विदेश में रहने वाले भारतीयों में अकसर आपने एक देश प्रेम की बातें सुनी होगीं। कहते हैं कि हिंदुस्तानी चाहें कहीं भी रहे लेकिन वह अपनी जड़ें नहीं भूलता है। हां, आम तौर पर भारत में रहने वाले लोग अमेरिका या कनाडा के वीजा और वहां की नागरिकता के लिए लालायित रहते हैं, लेकिन एक बार जब वह मिल जाता है, तो वह भारत को याद करने लगते हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया है। इसमें पिछले 26 सालों से अमेरिका की नागरिक महिला ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन दिया है। इतना ही नहीं महिला ने भारत के प्रति सच्ची निष्ठा रखने की भी शपथ ली है। महिला का कहना है कि वह भारतीय होकर अपने पूर्वजों के गांव में ही शांति के साथ मरना चाहती है।
यह पूरा मामला, आंध्र प्रदेश के एक गांव की रहने वालीं 94 वर्षीय कोंड्रागुंटा महालक्ष्म्मा का है। वर्तमान में वह अमेरिका की नागरिक हैं। लेकिन 2018 से भारत में रह रही हैं। पिछले मंगलवार को उन्होंने अपने बेटे के साथ जाकर बापटला जिले के कलेक्टर की जनसुनवाई में पूरे मामले को विस्तार से रखा।
उन्होंने बताया कि पति नागभूषणम की मृत्यु के बाद वह अपने बेटे डॉक्टर के. बुचैया चौधरी के पास अमेरिका चली गई थीं। वहां पर उन्होंने 2000 में नागरिकता हासिल कर ली। दो दशकों तक अमेरिका में अपने डॉक्टर बेटे के साथ रहने के बाद वह 2018 भारत लौट आईं और अपने पैतृक गांव में आकर दोबारा बस गईं। तब से लेकर अब तक वह वहीं रह रही हैं।
इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन नागरिकता के लिए आवेदन भी किया है। लेकिन नागरिकता की शर्तों के आधार पर प्रोसेस लंबा चलने की संभावना है। कलेक्टर विनोद कुमार की जनसुनवाई में अपने डॉक्टर बेटे के साथ पहुंची महालक्ष्म्मा ने कहा कि वह एक भारतीय होकर मरना चाहती हैं। इसलिए वह अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ने के लिए भी तैयार हैं। इसके बाद कलेक्टर ने एक अधिकारी ने मार्गदर्शन में भारत की निष्ठा और संविधान में सच्ची श्रद्धा रखने की की शपथ दिलवाई।
इसके बाद कलेक्टर विनोद कुमार ने मीडिया से बात करे हुए कहा, “तेलगू भाषा में शपथ के बाद उन्हें दस्तावेज सत्यापन के लिए कहा गया। पूरी प्रक्रिया को सावधानी पूर्वक संपन्न करने के बाद इसे गृहमंत्रालय को भेज दिया गया है। कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में काम पूरा हो गया है, लेकिन अब यह पूरा मामला गृह मंत्रालय के हाथ में हैं।” उन्होंने कहा, “उनके पास फिलहाल ओसीआई कार्ड है और वह अमेरिकी नागरिक भी हैं। चूंकि, उनकी उम्र हो चुकी है। इसलिए उन्होंने अपने शेष जीवन भारत में ही बिताने और एक भारतीय नागरिक के रूप में मृत्यु प्राप्त करने की प्रबल इच्छा व्यक्त की है। हमने जल्दी ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। अब उनका आवेदन गृहमंत्रालय के पास भेज दिया गया है।”
उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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