राजीव रंजन झा,दरभंगा। अखिल भारतीय पिछड़ा शोषित संगठन की जिला शाखा के तत्वावधान में उत्सव उद्यान परिसर में छत्रपति शाहू जी महाराज की 153वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर शाहू जी महाराज के तैलचित्र माला-पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उमेश राय की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने शाहू जी महाराज के जीवन-परिचय के साथ ही उनके ऐतिहासिक योगदान का विस्तार से उल्लेख किया। वक्ताओं ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रपौत्र होने की विरासत और गरिमा को आगे बढ़ाने के साथ ही शाहू जी ने कुछ ऐसे क्रांतिकारी राजनीतिक-सामाजिक कदम उठाए जो समय सीमा को तोड़ते हुए बहुत आगे निकलकर इतिहास के पन्नों में गहरे दर्ज हो गए।वक्ताओं
ने कहा कि भारत में सबसे पहले जातीय जनगणना कराने का श्रेय और उसे आधार मानकर 1902 में जब सामाजिक-शैक्षणिक आधार पर आरक्षण की बात कोई सोच भी नहीं सकता था, उस समय 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान कर उन्होंने भारतीय समाज़ में चल रही सामाजिक-राजनीतिक अन्यायपूर्ण व्यवस्था को चुनौती दी। मुख्य वक्ता शंकर प्रलामी ने कहा कि राजा की जमीन पर खड़े होकर आम अवाम की समस्याओं पर चिंतन करना और उसे साकार करना गैर मामूली बात है। अध्यक्षता करते हुए उमेश राय ने कहा कि शाहू जी ने सबसे पहले आरक्षण की अवधारणा दी।
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