वाराणसी, हिटी। अक्सर गर्मी के मौसम में अगलगी की घटनाएं होती हैं। कई बार इनमें काफी संख्या में लोग जान गंवा चुके हैं। हाल ही में लखनऊ में हुए अग्निकांड ने सामान्यजन को बुरी तरह झकझोरा है। किसी भवन में आग की सूचना पर फायर ब्रिगेड की रवानगी तो तत्काल होती है, लेकिन उसे मौके पर पहुंचने में समय तो लगता ही है। ऐसी स्थिति में जनसामान्य के लिए आग बुझाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल सीखना बेहद जरूरी दिखता है। इसके अलावा कुछ उपाय भी हैं, जिन्हें अपनाने से ऐसी घटनाओं से काफी हद तक बचा भी जा सकता है। वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक पीयूष मोर्डिया ने इस सन्दर्भ में कुछ सुझाव दिए हैं, जो अगलगी जैसी विकट परिस्थिति से निपटने में सहायक हो सकते हैं। शुष्क मौसम में अगलगी का खतरा ज्यादा रहता है। सभी भवनों में अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, फायर केबल, बालू से भरी बाल्टियां होनी चाहिए। इसमें खास यह कि आपातकालीन निकास जैसे प्रबंध हाल की घटनाओं के मद्देनजर जरूरी हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्राय: सभी घरों में इस्तेमाल अनिवार्य सा हो गया है, इसलिए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध भी उतने ही जरूरी होते जा रहे हैं। लोगों के पास आपातकालीन स्थिति में अग्निशमन नंबर- 101, एंबुलेंस सेवा के लिए 108 और पुलिस सेवा के लिए 112 पर अवश्य डायल करें。
– बहुमंजिला भवनों में मुख्य सीढ़ी के अलावा वैकल्पिक आपातकालीन निकास जरूर हो
– जेनरेटर, इनवर्टर, बिजली के पैनल सुरक्षित स्थान पर हों, बिजली के तार व्यवस्थित हों
– तेल से लगी आग पर पानी न डालें, उसे बालू, मिट्टी या प्रस्तावित यंत्र से ही बुझाएं
– भवनों के मुख्य द्वार बाहर की ओर खुलने वाले हों, बालकनी को कभी पूरी तरह बंद न करें
-गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल जैसे ज्वलनशील पदार्थ घरों में सुरक्षित स्थान पर रखे जाएं
– कहीं वेल्डिंग या ऐसे अन्य काम हो रहे हों तो वहां फायर एक्सटिंगुइशर अनिवार्य रूप से हो
– जलती बीड़ी, सिगरेट या माचिस की तीली जहां तहां न फेकें। पहले इसे पूरी तरह बुझा लें
– भवनों में आग बुझाने के उपकरण ऐसी जगह रखें, जहां से जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाल सकें
– आग यदि बिजली के उपकरण से लगे तो सबसे पहले मुख्य स्विच को सुरक्षित तरीके से बंद करें
– किसी के कपड़ों में आग लग जाय तो उसे भागने न दें, कंबल से ओढ़ाएं और उसे जमीन पर लोटने को कहें
– आग लगने पर घबराकर भवन से छलांग न लगाएं, सुरक्षित मार्ग तलाशें और गीले कपड़ों का सहारा लें
– भोजन बनाने के बाद सिलेंडर का रेगुलेटर याद से बंद कर दें, निकास मार्गों पर कोई अवरोध न रखें
– खलिहान या फूस के मकान रेलवे ट्रैक से कम से कम 400 मीटर की दूरी पर हों, ट्रांसफॉर्मर के नीचे भी न बनाएं
– मैरिज लॉन या अन्य ऐसे आयोजन स्थल मानकों के अनुरूप बनें और वहां पानी, बालू का प्रबंध हो
– पूजा, हवन अथवा दीपक से आरती करने के बाद अग्नि के बुझने पर ही उस स्थान से हटें
– आरंभिक स्थिति में खुद आग बुझाने का प्रयत्न करें और अग्निशमन दल को सूचित करें
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