15000 मौत की गोलियां बांटने चले फैयाज ने तोड़ दिया था इस्लाम से नाता, पूरी दुनिया को समझता था दुश्मन – Live Hindustan

मुहर्रम के जुलूस में दर्दनाशक दवा के नाम पर मौत की गोलियां बांटने वाला फैयाज प्रेमजी पुलिस की गिरफ्त में है। पूछताछ में उसने साफ तौर पर अपना जुर्म कबूल करते हुए खौफनाक इरादे बता दिए हैं। जांच में उसके बारे में जो कुछ पता चला है वह बेहद हैरान करने वाला है। मौत के इस सौदागर ने पुलिस को बताया कि वह कम से कम 15 हजार लोगों को मौत के घाट उतारना चाहता था। हालांकि पुलिस ने उसे समय पर पकड़ लिया और हजारों लोगों की जान बच गई। फैयाज ने कैप्सूल में जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने का केमिकल) भरकर लोगों में बांट दिया था। कुछ लोगों ने कैप्सूल खाया तो उनकी तबीयत बिगड़ गई।

फैयाज प्रेमजी ने पुलिस को बताया कि वह खोजा शिया समुदाय से है। आम तौर पर इस समुदाय के लोग गुजरात के कच्छ में ज्यादा रहते हैं। कहा जाता है कि गुजरात और पाकिस्तान के व्यापारी थे जो कि इस्लाम प्रचारकों और सूफियों के प्रभाव में आकर मुसलमान बन गए थे। खोजा मुसलमान मुख्य रूप से इस्माइल शिया संप्रदाय का ही पालन करते हैं। हालांकि कुछ खोजा सुन्नी इस्लाम के रास्ते भी चलते हैं। पाकिस्तान की मांग करने और फिर अलग राष्ट्र बनवाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना भी खोजा मुसलमान थे। खोजा मुसलमानों की धार्मिक परंपराएं कुछ अलग हैं। उनके पुरुष और महिलाएं साथ में नमाज अदा कर सकते हैं।

फैयाज पहले सुधारक के तौर पर खुद को पेश करता था। कई इंटरव्यू में फैयाज बता चुका है कि वह गुजरात का रहने वाला है लेकिन अब उसका परिवार पुणे में रहने लगा है। उसका कहना है कि उसके पिता पुणे में एक कारोबारी हैं। वह धार्मिक रूढ़िवादिता को लेकर भी अकसर सवाल किया करता था। उसने एक यूट्यूब वीडियो में कहा था कि सवाल पूछने की आदत उसे अपने नाना के परिवार से मिली है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि फैयाज प्रेमजी की पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी। इसके बाद वह सबको अपना दुश्मन समझने लगा था। वह सबसे बदला लेना चाहता ता। फैयाज प्रेमजी की मां और बहन ईरान में रहती हैं। वह खुद बीबीए ग्रैजुएट है। वह कुछ दिनों से काफी फ्रस्ट्रेटेड रहता था। हालांकि उसकी कोई मेडिकल हिस्ट्री नहीं मिली है।

प्रेमजी के मुताबिक उसने एक ग्रुप बनाकर खोजा शिया समुदाय में भी कई रीतियों को बदलना चाहा। वह रूढ़िवादी सोच के खिलाफ आवाज उठाता था और इस्लाम के उदारवादी रूप को प्रचारित करना चाहता था। एक इंटरव्यू में फैयाज ने कहा, मैं लोगों को बताना चाहता था कि इस्लाम के नाम पर जिस संकीर्ण विचारधारा को लोग फॉलो कर रहे हैं, वह गलत है। हमें सुधारवादी होना चाहिए। लेकिन हमारा समाज बहुत रूढ़िवादी है। इसलिए वे असानी से अपने माइंडसेट को बदल नहीं सकते।

फैयाज खोजा शिया समुदाय के उन लोगों में था जिन्हें अपने ही समुदाय से बड़ी शिकायतें थीं। इसीलिए लगों को अपने साथ लाने के लिए उसने एक ग्रुप बनाया और सोशल मीडिया पर भी ऐक्टिव रहने लगा। इसके बाद भी ज्यादा लोग उसके साथ जुड़ नहीं पाए। उसने कई बार दावा किया कि मौलवी और मौलानाओं की आलोचना करने की वजह से उसको धमकियां दी जाती थीं। पुणे में उसके कामकाज पर भी हमला हुआ और सामाजिक बहिष्कार होने लगा।

2019 में फैयाज ने अपने वीडियो में ही बताया कि अब उसका नाता इस्लाम से नहीं है और वह नास्तिक हो गया है। इसी साल वह ईरान गया। उसे उम्मीद थी कि ईरान में इस्लाम के सही स्वरूप (उसके मुताबिक) की इज्जत होगी। लेकिन उसके हाथ निराशा ही लगी और वह वापस भारत आ गया। भारत आकर उसने बताया कि ईरान तो और भी पीछे चल रहा है। इसके बाद दक्षिणपंथी यूट्यूब पॉडकास्ट में वह अपनी बात रखने लगा। उसने बताया कि ईरान में रहने के दौरान वह स्टॉक मार्केट से कमाई करता था।

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का ‘C सर्टिफिकेट’ भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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