राम मंदिर चंदा विवाद में बार एसोसिएशन का ऐलान, आरोपियों का पक्ष नहीं रखेंगे वकील, जानें अब तक कहां पहुंची जां – India.Com

Ram Mandir Donation case: उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में राम मंदिर के चंदे और दान में हुए कथित गबन का मामला अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है. इस मामले के सभी आठ आरोपियों को अयोध्या की विशेष अदालत में पेशी हो रही है. पेशी के बीच, स्थानीय वकीलों ने एकजुट होकर इस घोटाले के आरोपियों का बहिष्कार करने का फैसला किया है. दूसरी तरफ, गबन जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से लंबी पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया है.

सोमवार को फैजाबाद, अयोध्या, बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स एसोसिएशन की आम बैठक में वकीलों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि कोई भी स्थानीय वकील इस गबन मामले के आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा. एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मंदिर के चढ़ावे और दान की चोरी ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है. ऐसे में अयोध्या का कोई भी वकील इन आरोपियों का केस नहीं लड़ेगा.

एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी सदस्य ने इस प्रस्ताव का उल्लंघन किया और आरोपियों का पक्ष कोर्ट में रखा, तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही उसकी सदस्यता भी रद्द कर दी जाएगी. ANI के मुताबिक, साल 2005 में भी बार एसोसिएशन के वकीलों ने राम जन्मभूमि पर हुए आतंकवादी हमले के आरोपियों का केस लड़ने से साफ इनकार कर दिया था. इसके अलावा, वकीलों ने इस विवाद में घिरे ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों, चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तीन दिनों के भीतर अयोध्या छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है.

चंदा चोरी के कथित आरोपों से घिरे राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा ने शनिवार को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद, उत्तर प्रदेश पुलिस की टीम ने चंपत राय के आवास पर जाकर उनका बयान दर्ज किया. इस मामले में पुलिस अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें चंपत राय का पूर्व ड्राइवर भी शामिल है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 80 लाख रुपये की नगदी और विदेशी करेंसी बरामद की है.
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने एक बयान में कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्य इस घटनाक्रम से स्तब्ध हैं और वे यह सुनिश्चित करेंगे कि मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा बहाल किया जा सके. सूबे के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी मीडिया से बातचीत में आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले की गहराई से और पूरी तरह निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करेगी.

राम मंदिर चढ़ावा घोटाले का पर्दाफाश अयोध्या के पूर्व सपा विधायक पवन पांडे की शिकायत के बाद हुआ, जिन्होंने आरोप लगाया था कि राम मंदिर में आने वाले दान में से 7 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये का गबन किया गया है. मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तुरंत 14 जून को एक 3-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था. वहीं, 25 जून को राज्य सरकार के निर्देश पर अयोध्या में इस मामले को लेकर पहली प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई. FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा धारा 316(5) (आपराधिक विश्वासघात), धारा 317(4) और 317(5) (धोखाधड़ी और गबन) और धारा 61 और 3(5) (साजिश रचना और सामान्य मंशा) सहित कई गंभीर धाराओं के तहत दर्ज की गई है.  FIR में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव और मनीष यादव समेत कई अन्य लोगों को नामजद किया गया है. आज कोर्ट में आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने को लेकर सुनवाई होनी है. सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) से जेल से ही सुनवाई कराने पर विचार कर रहे हैं.
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सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ … और पढ़ें
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