अंतरिक्ष से लेकर युद्ध के मैदान तक… दुश्मनों को पलभर में तबाह कर देगी भारत की अग्नि, प्रलय और ब्रह्मोस मिसाइल – Jagran

भारत ने 1982 से अपने मिसाइल भंडार का विस्तार किया है, जिसमें अग्नि, प्रलय और ब्रह्मोस जैसी शक्तिशाली मिसाइलें शामिल हैं। ये मिसाइलें परमाणु प्रतिरोध, …और पढ़ें
भारत की अग्नि, प्रलय और ब्रह्मोस मिसाइलों की ताकत
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 1982 में शुरू हुए ‘एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम’ (IGMDP) के बाद से भारत ने अपने मिसाइल भंडार में महत्वपूर्ण विस्तार किया है। आज के समय में भारत के पास अंतरिक्ष में उपग्रहों को मार गिराने से लेकर युद्धक्षेत्र में टैंकों को तबाह करने वाली मिसाइलों की पूरी श्रृंखला मौजूद है।
दरअसल, हाल के मिसाइल परीक्षणों और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सक्रिय उपयोग के माध्यम से भारत ने लगातार अपनी मिसाइलों की प्रभावशीलता का प्रदर्शन किया है। भारत के पास कई तरह की मिसाइलें हैं। हर मिसाइल को अलग-अलग काम के लिए बनाया गया है।
वर्तमान में भारत की तीन आक्रामक मिसाइलें सबसे अधिक चर्चा में रहीं- अग्नि, प्रलय और ब्रह्मोस। अमूमन इन तीनों का नाम एक साथ लिए जाता है, लेकिन तीनों एक दूसरे से बहुत अलग हैं। अग्नि को परमाणु हमले रोकने के लिए बनाया गया है और ब्रह्मोस को तेज और सटीक पारंपरिक हमले के लिए बनाया गया है। वहीं, प्रलय को लड़ाई के मैदान में दुश्मन के रडार और एयरबेस तबाह करने के लिए बनाया गया है। आइए जानते हैं इनके बारे में…
अग्नि मिसाइल भारत की सबसे बड़ी ताकत में से एक है। इसे दुश्मन पर दूर से ही हमला करने के लिए बनाया गया है। अग्नि मिसाइल श्रृंखला में छोटी और बड़ी दोनों तरह की मिसाइलें हैं। इसमें लगभग 700 किमी की अग्नि-I से लेकर 8,000 किमी से अधिक की अग्नि-V तक की मार क्षमता है। अग्नि मिसाइ जमीन से छोड़ी जाती है। यह परमाणु और सामान्य दोनों हथियार ले जाने में सक्षम है।
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सबसे नई और ताकतवर अग्नि-V मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स (एमआईआरवी) सहित भारी परमाणु पेलोड ले जा सकती है। यह एक सड़क-चालित, तीन-चरण वाली ठोस-ईंधन वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे सड़क मार्ग से कहीं भी ले जाकर दागा जा सकता है। 8,000 किमी से अधिक की दूरी तक मार करने में सक्षम है। अग्नि-V श्रृंखला युद्धक्षेत्र में उपयोग के लिए नहीं बनाई गई है, बल्कि रणनीतिक प्रतिरोध के लिए बनाई गई है। ये सिर्फ दुश्मन को डराने और हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई के लिए है।
प्रलय भारत की DRDO द्वारा बनाई गई लघु-श्रेणी की सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर है और यह 350 से 1,000 किलोग्राम तक के वजन वाले वॉरहेड ले जा सकती है। यह अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस को चकमा देकर पारंपरिक हमलों को अंजाम देने में माहिर है। यह कैनिस्टर में पैक रहती है, इसलिए जल्दी स्टोर और लॉन्च की जा सकती है।
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प्रलय को दुश्मन के रडार, कमांड सेंटर, एयरपोर्ट और रनवे को तबाह करने के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आखिरी समय में हवा में दिशा बदल सकती है, जिससे दुश्मन की मिसाइलें इसे रोक नहीं पातीं। चीन के डोंगफेंग-12 और रूस के इस्कंदर मिसाइल के तरह ही प्रलय को भारत ब्रह्मोस, निर्भय और पिनाका के साथ मिलाकर इस्तेमाल करेगा। इसकी तैनाती से सेना को सटीक हमला करने की ताकत मिलेगी और बॉर्डर से सटीक हमला करने की क्षमता बढ़ेगी।
ब्रह्मोस बाकी दोनों मिसाइलों से बिल्कुल अलग है। यह बैलिस्टिक नहीं, बल्कि क्रूज मिसाइल है। इसे भारत और रूस ने संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। इसकी गति 2.8 मैक से 3 मैक तक है और यह 300 से 800 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है।
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ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज गति वाली परिचालन क्रूज मिसाइलों में से एक है। इसे जमीन, समुद्र या हवा से भी दागा जा सकता है। यहां तक कि इसे सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों से भी लॉन्च किया जा सकता है।
ब्रह्मोस का पहली बार उपयोग मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था। इसमें ब्रह्मोस ने दुश्मन के बड़े ठिकानों को सटीक निशाना बनाया, जिससे पूरी दुनिया ने भारत की ताकत देखी।

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