रांची, विशेष संवाददाता। देश से क्षय रोग (टीबी) के उन्मूलन के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ‘टीबी मुक्त भारत-100 दिवसीय विशेष अभियान’ चला रहा है। इस संबंध में देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को पत्र जारी कर अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर जनजागरुकता कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया गया है। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से परिसर में टीबी जागरुकता अभियान चलाने, निबंध, पोस्टर, भाषण व सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन करने, विद्यार्थियों को टीबी के प्रति संवेदनशील बनाने, निक्षय प्रतिज्ञा दिलाने और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरुकता संदेश प्रसारित करने को कहा है। इसके साथ ही निक्षय मित्र के रूप में पंजीकरण कर टीबी मरीजों के सहयोग और जागरुकता गतिविधियों में योगदान देने का भी आह्वान किया गया है। प्रत्येक संस्थान को अभियान के प्रभावी संचालन के लिए एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त करना होगा.
इस अभियान के तहत विशेष रूप से जनजातीय समुदायों में टीबी की अधिकता के मद्देजनर कुपोषण, भौगोलिक दुर्गमता, स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच, जागरुकता की कमी और सामाजिक कलंक जैसी चुनौतियों के कारण इन क्षेत्रों में टीबी नियंत्रण कठिन बना हुआ है। इसे देखते हुए जनजातीय नेताओं, पारंपरिक वैद्यों, शिक्षकों, टीबी से स्वस्थ हो चुके लोगों, स्वयंसेवकों तथा छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है.
निर्देश में जनजातीय क्षेत्रों में सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार करने, छात्र टीबी एंबेसडर के माध्यम से जागरुकता बढ़ाने, स्वास्थ्य शिविरों से लोगों को जोड़ने और ग्राम सभाओं में टीबी मुक्त भारत अभियान को प्रमुख एजेंडा के रूप में शामिल करने की भी सलाह दी गई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), ने सभी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों से अभियान के तहत आयोजित गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में आयोग को भेजने का अनुरोध किया है.
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