गांवों के अदर नहीं भटकेगा GPS, 'पीपल के पेड़' और 'हैंडपंप' नामों से मिलेगी मुक्ति; सड़क का होगा अपना डिजिटल नाम और कोड – village road naming digital mapping for rural india news in hindi – Jagran

गांवों में सटीक पते न होने से इमरजेंसी और डिलीवरी में भारी दिक्कत होती है। ऐसे में अब सरकार हर ग्रामीण सड़क को नाम और डिजिटल कोड देगी, जो 'ग्राम मानचि …और पढ़ें
एआई द्वारा बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।
गांवों की सड़कों को मिलेगा खास नाम और कोड।
QR कोड से मिलेगी सड़क की मरम्मत व रास्ते की जानकारी।
ग्राम पंचायतें करेंगी सड़कों के नामकरण और कोडिंग का जिम्मा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप कभी किसी गांव के सफर पर गए हैं, तो आपको पता होगा कि वहां का रास्ता ढूंढने के लिए जीपीएस (GPS) भी हाथ खड़े कर देता है। अक्सर आपको ‘पीपल के पेड़ से बाएं मुड़ जाना, हैंडपंप के आगे स्कूल के पास पूछ लेना जैसे रास्तों के भरोसे जाना पड़ता है। लेकिन अब गांवों का यह नजारा बदलने वाला है।
पंचायती राज मंत्रालय एक ऐसी योजना पर काम कर रहा है, जिससे हर गांव की गली और सड़क को एक खास नाम और कोड दिया जाएगा। इससे गांव के रास्ते भी डिजिटल मैप पर आसानी से दिखने लगेंगे, ताकि एम्बुलेंस, पोस्टमैन, सरकारी अधिकारी और डिलीवरी बॉय बिना भटके सही जगह पहुंच सकें।
मंत्रालय ने इसके लिए ‘इंट्रा-विलेज रोड कोडिंग एंड ग्रेडिंग सिस्टम’ नाम का एक प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत गांव की सड़कों को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा। मुख्य सड़क, क्रॉस रोड, अन्य सड़क। इसके अलावा अब कुएं वाली गली या स्कूल के पीछे वाली सड़क जैसी जगहों को एक पक्का कोड और नाम मिलेगा।
सांकेतिक तस्वीर। (57)
दूसरी ओर हर सड़क पर एक साइनबोर्ड और क्यूआर (QR) कोड लगाया जाएगा। इस कोड को स्कैन करते ही मोबाइल पर सड़क का नाम, उसकी मरम्मत का इतिहास और रास्ते की पूरी जानकारी ‘ग्राम मानचित्र’ ऐप के जरिए मिल जाएगी।
बता दें कि पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज के मुताबिक, गांवों में सड़कों का कोई तय नाम न होने से सबसे ज्यादा दिक्कत इमरजेंसी (जैसे मेडिकल इमरजेंसी या आग लगने पर) के समय आती है। स्मार्टफोन के इस दौर में गांवों के पास भी एक सही पहचान प्रणाली होना जरूरी है।
इसके साथ ही इस कदम का एक और उद्देश्य भ्रष्टाचार रोकना भी है। इस बात को ऐसे समझिए कि अक्सर सरकारी कागजों में एक ही सड़क के अलग-अलग नाम होने की वजह से हेरफेर हो जाता था। एक ही सड़क के नाम पर बार-बार फंड पास करा लिया जाता था। नया कोड मिलने से यह साफ रहेगा कि किस सड़क के लिए कितना पैसा आया और कितना काम हुआ। इससे पारदर्शिता आएगी।
शुरुआती दौर में इस योजना को ‘स्वामित्व’ योजना के तहत आने वाले गांवों में लागू किया जाएगा।
देश के करीब 3.3 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे का काम पूरा हो चुका है।
भारत में कुल करीब 6 लाख बसे हुए गांव हैं, और सरकार धीरे-धीरे सभी गांवों को इस सिस्टम से जोड़ेगी।
गौरतलब है कि इस काम को जमीन पर उतारने की मुख्य जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होगी। पंचायतें ही तय करेंगी कि उनके इलाके की किस सड़क का क्या नाम और कोड होगा। 

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