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अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि पाकिस्तान के “डबल टैप” हमलों में पूर्वी अफगानिस्तान के तीन प्रांत तबाह हुए हैं जिनमें छत्तीस नागरिकों की मौत हुई और एक सौ तिरसठ लोग घायल हुए। मरने वालों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल बताए गए हैं। वहीं पाकिस्तान अपनी पुरानी चाल चलते हुए इन हमलों को आतंकवाद विरोधी कार्रवाई बताकर निर्दोष लोगों की मौत को छिपाने की कोशिश कर रहा है। इस बीच, भारत ने पाकिस्तान को कड़ी लताड़ लगाते हुए साफ कर दिया है कि नई दिल्ली अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता के साथ मजबूती से खड़ी है।
हम आपको बता दें कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में गूंज रहे “आजादी” के नारों, बलूचिस्तान में भड़कते विद्रोह और अपने ही देश में गहराते संकट से घबराया पाकिस्तान अब ध्यान भटकाने के लिए अफगानिस्तान पर बमबारी कर रहा है। भारत ने पाकिस्तान के इस हमले को बेलगाम आक्रामकता और क्षेत्रीय शांति पर सीधा हमला बताते हुए कहा है कि इस्लामाबाद अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने के लिए सीमापार हिंसा का सहारा ले रहा है। देखा जाये तो अफगानिस्तान की धरती पर निर्दोष नागरिकों के खून से खेलकर पाकिस्तान एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि उसकी सैन्य नीति अब सुरक्षा नहीं बल्कि हताशा और राजनीतिक बौखलाहट से संचालित हो रही है।
हम आपको बता दें कि भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की संप्रभुता पर हमला किया है और यह पूरा क्षेत्र अस्थिर करने वाली हरकत है। नई दिल्ली ने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार अपने आंतरिक संकटों और विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए सीमापार हिंसा का सहारा लेता रहा है।
देखा जाये तो यह हमला पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लगातार बिगड़ते रिश्तों का परिणाम है। वर्ष 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से इस्लामाबाद और काबुल के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान और उससे जुड़े संगठन अफगान धरती का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन तालिबान सरकार बार बार इस आरोप को खारिज करती रही है। इसके बावजूद पाकिस्तान ने रात के अंधेरे में अफगान गांवों पर बम बरसाकर यह साबित कर दिया कि वह अब कूटनीति से ज्यादा सैन्य आक्रामकता पर भरोसा कर रहा है।
सबसे भयावह पहलू तथाकथित “डबल टैप” हमला है। अफगान उप सरकारी प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत के अनुसार पहले बम गिराए गए और जब स्थानीय लोग घायलों को बचाने पहुंचे तो उसी स्थान पर दूसरी बार हमला किया गया। यह तरीका दुनिया भर में सबसे अमानवीय सैन्य रणनीतियों में गिना जाता है, क्योंकि इसका सीधा निशाना राहत और बचाव कार्य करने वाले लोग होते हैं। पाकिस्तान ने इस आरोप पर चुप्पी साध ली है, जो उसके इरादों पर और गंभीर सवाल खड़े करता है।
पक्तिया प्रांत के निवासी आदम खान ने अस्पतालों का भयावह मंजर बयान करते हुए कहा कि बच्चों की चीखें और परिजनों का विलाप शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। पक्तिका प्रांत में एक घर पर हुए हमले में छह गरीब लोगों की मौत हुई। स्थानीय समुदाय नेता अमीन मंगल ने बताया कि उस परिवार का कोई कमाने वाला सदस्य भी नहीं था और वे दान के सहारे जीवन चला रहे थे। इन बयानों ने पाकिस्तान के उस दावे की पोल खोल दी है जिसमें वह केवल आतंकियों को निशाना बनाने की बात कर रहा है।
सामरिक दृष्टि से देखें तो यह हमला पाकिस्तान की गहरी बेचैनी और असुरक्षा को उजागर करता है। पाकिस्तान इस समय आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक आतंकवाद से जूझ रहा है। कराची में हुए हालिया हमले के बाद वहां की सेना और सरकार पर जबरदस्त दबाव बना हुआ था। ऐसे में अफगानिस्तान पर हमला करके पाकिस्तान ने अपनी जनता को यह संदेश देने की कोशिश की कि वह “कठोर कार्रवाई” कर रहा है। लेकिन यह दांव उलटा भी पड़ सकता है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार पहले ही पाकिस्तान से नाराज है और अब सीमा पर संघर्ष और तेज होने की आशंका बढ़ गई है।
रणनीतिक स्तर पर इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर दक्षिण एशिया की सुरक्षा संरचना पर पड़ सकता है। भारत ने जिस मजबूती से अफगानिस्तान की संप्रभुता का समर्थन किया है, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि नई दिल्ली क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दे पर अब अधिक मुखर भूमिका निभाएगी। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति बेहद असहज है, क्योंकि एक तरफ उसे पश्चिमी सीमा पर तालिबान का दबाव झेलना पड़ रहा है और दूसरी तरफ भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी आक्रामक नीतियों को बेनकाब कर रहा है।
बहरहाल, अफगानिस्तान पर बम बरसाने वाला पाकिस्तान अपनी ही सरजमीं पर उठ रहे विस्फोटक हालात को नजरअंदाज कर रहा है। जिस देश की सत्ता पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में “आजादी” के नारों से कांप रही हो और जहां बलूचिस्तान में अलगाव की आग लगातार भड़क रही हो, वह अब अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने के लिए सीमापार सैन्य आक्रामकता का सहारा ले रहा है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जनता खुलकर इस्लामाबाद के खिलाफ सड़कों पर उतर रही है, जबकि बलूचिस्तान में दशकों से जारी विद्रोह पाकिस्तानी सेना की नींद उड़ाए हुए है। विडंबना यह है कि जिस “आजादी” के नारे को पाकिस्तान ने वर्षों तक दूसरे देशों के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल किया, वही अब उसके अपने कब्जे वाले इलाकों में उसकी सत्ता को चुनौती दे रहा है। आर्थिक बदहाली, राजनीतिक अराजकता और आंतरिक विद्रोह से घिरा पाकिस्तान अब अफगानिस्तान पर हमले करके अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि इस्लामाबाद की असली जंग अब उसकी सीमाओं के बाहर नहीं बल्कि उसके भीतर भड़क रही है।
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हम आपको बता दें कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में गूंज रहे “आजादी” के नारों, बलूचिस्तान में भड़कते विद्रोह और अपने ही देश में गहराते संकट से घबराया पाकिस्तान अब ध्यान भटकाने के लिए अफगानिस्तान पर बमबारी कर रहा है।
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