अपनी नई-नई खोजों से दुनिया को हैरान करने वाले वैज्ञानिकों ने फिर एक अनोखा कारनामा कर दिखाया है. दरअसल वैज्ञानिकों ने अमेरिका के अलास्का में करीब 3000 छोटे भूकंपों का पताया लगाया है. वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि इन छोटे भूकंप केंद्रों के नीचे एक छोटी टेक्टोनिक प्लेट है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से भविष्य में इस इलाके के भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगी. दरअसल ये समुद्र के नीचे मौजूद एक मोटी चट्टानी परत है, जो धीरे-धीरे उत्तरी अमेरिकी टेक्टोनिक प्लेट के नीचे धंस रही है. इसकी वजह से अलास्का की पर्वतमालाएं ऊपर उठ रही हैं. इसी इलाके में उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी डेनाली भी मौजूद है.
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वैज्ञानिकों ने अपने शोध के लिए डेनाली फॉल्ट के दक्षिण में नए सीस्मोमीटर लगाए थे. इन्हीं उपकरणों ने 250 किलोमीटर लंबी सीधी लाइन में फैले करीब 3,000 छोटे भूकंप रिकॉर्ड किए. इसी पैटर्न ने वैज्ञानिकों को धरती के नीचे छिपी माइक्रोप्लेट की सीमा का पता लगाने में मदद की. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह माइक्रोप्लेट भूकंप से पैदा होने वाली ऊर्जा को एक खास दिशा में केंद्रित कर सकती है. यही वजह है कि इस क्षेत्र में भूकंप और छोटे ज्वालामुखियों की गतिविधियों पर इसका असर पड़ सकता है.
हालांकि वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि इस खोज का मतलब यह नहीं है कि जल्द ही कोई बड़ा भूकंप आने वाला है. फिलहाल ऐसा कोई प्रत्यक्ष संकेत नहीं मिला है. लेकिन यह अध्ययन जरूर बताता है कि धरती के नीचे की संरचना पहले की सोच से कहीं ज्यादा जटिल है और बड़े भूकंप कैसे शुरू होते हैं, इसे समझने में यह खोज अहम साबित हो सकती है. वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि जिस जगह से 2002 में 7.9 तीव्रता वाले डेनाली भूकंप की शुरुआत हुई थी, वह भी इस माइक्रोप्लेट के किनारे के पास है. अब शोधकर्ता कंप्यूटर मॉडल की मदद से यह समझने की कोशिश करेंगे कि दोनों के बीच कितना गहरा संबंध है. बता दें कि भूकंप से जुड़ा ये शोध द सीस्मिक रिकॉर्ड जर्नल में प्रकाशित हुआ है.
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