मुख्य बातें
LPG Price Today ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने जुलाई के पहले ही दिन 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमत घटा घटा दिए थे, जिससे दिल्ली में इसका दाम 3113.50 रुपये से घटकर 2,930 रुपये प्रति सिलेंडर हो गया। एक जुलाई से कीमतों में 183.50 रुपये की कमी की गई है। वहीं, 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर की कीमत में भी 13 रुपये की कमी की है।
इसके बाद, दिल्ली में 5 किलो वाले एफटीएल सिलेंडर के दाम अब 808.50 रुपये है। दूसरी ओर आज 2 जुलाई को भी घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट जस के तस हैं। इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में आज भी 14.2 किलो वाला सिलेंडर 942 रुपये का है।
इंडियन ऑयल के 2 जुलाई रेट के अनुसार पटना में घरेलू सिलेंडर 1031.5 रुपये और कमर्शियल का दाम 3227 रुपये है। लखनऊ में घरेलू सिलेंडर 979.50 तो कमर्शियल 3052.5 रुपये का है। जयपुर में भी आज घरेलू एलपीजी सिलेंडर 945.5 और कमर्शियल सिलेंडर 2957.50 रुपये का है। जबकि, कोलकाता घरेलू सिलेंडर 968 और कमर्शियल 3081.50 रुपये का है।
लेह में आज घरेलू सिलेंडर 1196.5 और कमर्शियल 3594.50 रुपये का है। चेन्नई में नीला वाला सिलेंडर 3106 रुपये और लाल वाला रसोई गैस सिलेंडर 957.5 रुपये का है। देहरादून में घरेलू सिलेंडर के दाम आज 961 रुपये पर स्थिर हैं, जबकि 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर 2983 रुपये पर है।
इंदौर में कमर्शियल सिलेंडर 3040.50 रुपये जबकि, घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 970 रुपये पर स्थिर है। रांची में घरेलू सिलेंडर के दाम 999.5 रुपये हैं और कमर्शियल के दाम सिलेंडर 3131 रुपये है।
बता दें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों HPCL, IOCL और भारत पेट्रोलियम ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते 7 मार्च को भी एलपीजी की कीमतों में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की थी। अप्रैल में कंपनियों ने पश्चिम एशिया में तनाव के बीच महानगरों में कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडरों की कीमतों में 195.50 रुपये की वृद्धि की थी। उस संशोधन के साथ, कमर्शियल एलपीजी की कीमतें कोलकाता में 2,208 रुपये, मुंबई में 2,031 रुपये और चेन्नई में 2,246.50 रुपये तक बढ़ा दी गई थीं।
जनवरी में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 111 रुपये की वृद्धि के बाद, दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का दाम 1,691.50 रुपये हो गया था। कमर्शियल एलपीजी दरों में वृद्धि के साथ-साथ, एक जनवरी से 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलेंडर की कीमत में भी 27 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
भारत की लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी सप्लाई ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है, ऐसे में समुद्री नौवहन संकट ने घरेलू रसोई गैस के लिए सीधा और गंभीर खतरा पैदा कर दिया था। फिर भी, भारत ने संघर्ष के चरम पर अपनी डिमांड और सप्लाई में व्यापक बदलाव करके लाखों घरों तक रसोई गैस की कमी नहीं होने दी।
बीपीसीएल के पूर्व निदेशक (मार्केटिंग) सुखमल जैन ने एएनआई को बताया कि सरकार का मुख्य निर्देश सीधा और अटल था। जैन ने कहा, “सरकार ने सबसे पहला निर्णय यह लिया कि हम घरेलू रसोई एलपीजी को बाकी सब चीजों से ऊपर प्राथमिकता देंगे।”
जैन ने बताया, “रेस्टोरेंट और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली कमर्शियल एलपीजी पर काफी हद तक रोक लगा दी गई। अगर हमने इसे प्रतिबंधित नहीं किया होता, तो इसका दुरुपयोग और कालाबाजारी हो सकती थी।” उन्होंने पुष्टि की कि कुल कमर्शियल उपयोग में प्रतिदिन 90,000 टन से गिरकर 75,000 टन की महत्वपूर्ण गिरावट आई।
जैन ने जोर देकर कहा, “हमने डिलीवरी के लिए एक DAC लागू की। तीनों कंपनियों में 95 से 98 प्रतिशत सप्लाई इस डिजिटल कोड के माध्यम से भेजी गई, जिससे स्पष्ट संदेश गया कि केवल वास्तविक ग्राहकों को ही रिफिल मिल रहे हैं।”
जैन ने खुलासा किया, “हमारा एलपीजी उत्पादन अपनी सामान्य दर का लगभग डेढ़ गुना हो गया, जो लगभग 55 प्रतिशत बढ़ गया। उत्पादन 33,000-34,000 टन प्रतिदिन से उछलकर प्रभावशाली 54,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया।” उन्होंने आगे कहा, “हमने अपने भंडार को स्थिर करने के लिए अमेरिका, अर्जेंटीना और अन्य गैर-मध्य पूर्वी देशों से एलपीजी कार्गो सुरक्षित किए।”
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में ‘लाइव हिन्दुस्तान’ की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए ‘कुछ अलग’ और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
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