'मैं वापस आऊंगा' के मेकर्स ने जनता से कनेक्शन के लिए लगाई ये स्ट्रेटेजी, 'फ्लॉप' स्टार्ट के बाद भी हुई 'हिट' – AajTak

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इम्तियाज अली की फिल्म मैं वापस आऊंगा ने फिल्म ट्रेड का गेम पलट दिया है. पहले हफ्ते में 12.25 करोड़ रुपये कमाने वाली 70 करोड़ रुपये के रिपोर्टेड बजट में बनी फिल्म को ‘फ्लॉप’ मान लेने में कोई हैरानी की बात नहीं है, लेकिन इम्तियाज की फिल्म ने अपने टाइटल को सच्चा साबित करते हुए दूसरे हफ्ते में बॉक्स ऑफिस पर ऐसी वापसी की, जिसने ट्रेड पंडितों को गलत साबित कर दिया.
21 दिनों में मैं वापस आऊंगा ऑलमोस्ट 52 करोड़ रुपये नेट इंडिया और 77 करोड़ रुपये वर्ल्डवाइड कलेक्शन के साथ बॉक्स ऑफिस पर कामयाब फिल्म बन चुकी है और ये सारा कमाल जनता के प्यार का है. पहले दिन से ही मैं वापस आऊंगा ने जनता के इमोशन्स को ऐसा झिंझोड़ा कि थिएटर्स में इस फिल्म को तीसरे हफ्ते में भी दर्शकों की कमी नहीं पड़ रही, लेकिन असल में जनता से ये कनेक्शन जुड़ने के पीछे भी मेकर्स की शानदार प्लानिंग है.
1947 के भारत-पाकिस्तान बंटवारे से प्रभावित लोगों के जीवनभर के दर्द और मेंटल ट्रॉमा को दिखाने वाली इस फिल्म को युवाओं समेत हर उम्र के दर्शकों का साथ मिला है. फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना और शरवरी ने महत्वपूर्ण किरदार निभाए हैं और इनके काम की भी बहुत तारीफ हुई है. जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं.
इम्तियाज अली के प्रोडक्शन हाउस विंडो सीट फिल्म्स के प्रोड्यूसर मोहित चौधरी ने स्क्रीन को बताया है कि मैं वापस आऊंगा के लिए शुरुआत से ही ‘ऑडियंस फर्स्ट’ स्ट्रेटेजी बनाई गई थी. मेकर्स ने तय कर लिया था कि वो पहले वीकेंड के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों या शुरुआती ट्रेंड पर निर्भर नहीं रहेंगे. उन्हें पूरा भरोसा था कि जनता उनकी फिल्म से कनेक्ट करेगी और इसलिए ट्रेडिशनल प्रमोशन या पीआर गेम से ज्यादा लोगों के बीच फिल्म पहुंचाने पर जोर दिया गया.
मैं वापस आऊंगा की रिलीज से करीब एक हफ्ता पहले मेकर्स ने देशभर में एडवांस स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी. सबसे पहली स्क्रीनिंग दिल्ली में बंटवारे का दर्द झेल चुके लोगों के लिए रखी गई थी. मेकर्स ने इसे उस पीढ़ी को समर्पित श्रद्धांजलि बताया, जिसने 1947 की त्रासदी को अपनी आंखों से देखा था.
रिलीज के बाद इम्तियाज अली खुद अलग-अलग शहरों में पहुंचे. उन्होंने दर्शकों के साथ फिल्म देखी और उनसे सीधी बातचीत की. मोहित चौधरी कहते हैं, ‘हमारा मकसद सिर्फ इतना था कि फिल्म लोगों तक पहुंचे और फैसला वही करें.’ मोहित ने ये भी कहा, ‘इस फिल्म ने हमें एक बड़ी सीख दी कि अगर आपको अपनी फिल्म पर भरोसा है, तो फिक्स फॉर्मूलों, आंकड़ों या इंडस्ट्री की ट्रेडिशनल सोच से ज्यादा प्रभावित नहीं होना चाहिए.’
फिल्म के एक और प्रोड्यूसर शिबाशीष सरकार का मानना है कि यह स्ट्रेटेजी फिल्म की थिएट्रिकल मार्केटिंग में आए बड़े बदलाव को दिखाता है. उन्होंने कहा, ‘कोविड के बाद दर्शकों का बिहेवियर बदल चुका है. आज सबसे बड़ा मार्केटिंग टूल खुद दर्शक हैं. अगर उन्हें फिल्म पसंद आ जाए, तो वही उसकी सबसे बड़ी मार्केटिंग कर देते हैं.’
फिल्म का म्यूजिक भी रिलीज से काफी पहले लॉन्च कर दिया गया था, ताकि गाने धीरे-धीरे लोगों तक पहुंच सकें. शिबाशीष का कहना है कि शुरुआती बॉक्स ऑफिस आंकड़े उम्मीद से कम रहने के बावजूद इम्तियाज अली अपने फैसले पर टिके रहे.
उन्होंने बताया, ‘कई फिल्ममेकर्स शुरुआती कलेक्शन कमजोर होने पर दर्शकों के बीच जाने से बचते हैं, लेकिन इम्तियाज हर हाल में लोगों से मिलना चाहते थे. उन्हें पता था कि मैं वापस आऊंगा का सब्जेक्ट आसान नहीं है, लेकिन उन्हें भरोसा था कि उन्होंने इसमें उम्मीद, इंसानियत और प्यार का संतुलन बनाए रखा है.’ और इसी संतुलन ने इम्तियाज के भरोसे को एक ऐसी शानदार बॉक्स ऑफिस सक्सेस में बदला, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. फिल्म की कमाई पर बात करते हुए शिबाशीष सरकार ने कहा कि किसी भी फिल्म की सक्सेस सिर्फ टोटल कलेक्शन से नहीं आंकी जानी चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘हमने फिल्म का बजट कंट्रोल में रखा था. रिलीज से पहले ही डिजिटल, सैटेलाइट और म्यूजिक राइट्स के जरिए आधे से ज्यादा लागत निकल चुकी थी. इसलिए पूरी उम्मीद सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर नहीं टिकी थी.’
मोहित चौधरी और शिबाशीष सरकार दोनों का मानना है कि मैं वापस आऊंगा का थिएट्रिकल सफर इस बात का सबूत है कि अगर फिल्म पर भरोसा हो और दर्शकों से सीधा कनेक्शन बनाया जाए, तो इंडस्ट्री के बने-बनाए फॉर्मूलों को भी चुनौती दी जा सकती है.
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