भारत-जापान पूर्व में हुए व्यापार समझौते की समीक्षा करने पर सहमत हो गये हैं। गुरुवार को शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने यह प्रस्ताव रखा जिस पर जापान की प्रधानमंत्री ने भी सहमति व्यक्त की। शिखर सम्मेलन के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि दोनों देशों के अधिकारी आने वाले दिनों में इस पर आगे की बातचीत शुरू करेंगे। भारत और जापान के बीच 2011 में व्यापक आर्थिक भागीदारी व्यापार समझौता (सिपा) हुआ था लेकिन इसके बावज़ूद भारत के निर्यात में अपेक्षित बढोत्तरी नही हुई है। इसलिए भारत समझौते के कुछ प्रावधानों में बदलाव चाहता है।
भारत-जापान के बीच सालाना व्यापार 27 अरब डालर के करीब है जिसमें भारत से निर्यात 6 अरब डालर और आयात 21 अरब डालर है। यानि जापान के साथ सालाना 15 अरब डालर का व्यापार घाटा है। भारत इसे कम करने के लिए प्रयासरत है। इसके अलावा दोनों देशों में स्थानीय करेंसी में व्यापार करने पर भी चर्चा हुई लेकिन कोई नतीजा नही निकला। सूत्रों का कहना है कि यह तभी संभव हो पाता है जब द्विपक्षीय व्यापार बराबरी का हो। मिसरी ने शिखर सम्मेलन के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह मुख्यतः तीन बिन्दुओं पर केंद्रीत रहा है जिसमें आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। उन्होने कहा कि दुर्लभ खनिज में जापान के साथ सहयोग महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे किसी एक देश पर निर्भरता कम होगी। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जापान में हुए पिछले वार्षिक सम्मेलन के बाद से अब तक दोनों देशों के व्यवसाय के बीच 120 से अधिक समझौते हुए हैं।
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