डीजल की जगह एलएनजी से चलने वाले भारी वाहनों पर कोल इंडिया का जोर – Live Hindustan

डीजल की जगह एलएनजी (लिक्विड नेचुरल गैस) से चलने वाले भारी वाहनों पर कोल इंडिया का जोर है। कोल इंडिया मुख्यालय कोलकाता में एलएनजी-चालित वाहनों पर आयोजित बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। कोल इंडिया के निदेशक (तकनीकी) अच्युत घटक ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एलएनजी डीजल का एक स्वच्छ, पर्यावरण के अनुकूल और अधिक किफायती विकल्प है, जो कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम करते हुए परिचालन लागत को भी घटाता है। मौके पर एलएनजी चालित डंपर-ट्रक जैसे भारी वाहन बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि, एलएनजी आपूर्तिकर्ता कंपनी गेल के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। खनन कार्यों में एलएनजी को अपनाने के लिए बहुमूल्य अंतर्दृष्टि, तकनीकी समाधान और सर्वोत्तम पद्धतियों पर मंथन किया गया। कोयला कंपनियों में एलएनजी अपनाने की पहल 2021 से हो रही है। पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया। मध्य पूर्व की जंग के बाद अब एलएनजी को लेकर सक्रियता बढ़ गई है। दूसरी तरफ कोयले की कॉमर्शियल माइनिंग में निजी कंपनियों की एंट्री ने कोल इंडिया पर उत्पादन लागत घटाने का दबाव बढ़ा दिया है। कॉमर्शियल माइनिंग में कम कीमत पर मजदूर मिल रहे हैं। कोल इंडिया इसकी भरपाई एलएनजी का उपयोग कर कर सकती है。
पर्यावरण सुधार और ईंधन लागत में कमी के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (डंपरों) में डीजल की जगह एलएनजी किट लगाने की पायलट परियोजना पर तीन-चार साल से काम कर रही है। अनुमान के अनुसार इससे सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये की डीजल खर्च में बचत संभव है।
ढाई हजार से अधिक डंपर कोल इंडिया के पास
कोल इंडिया के पास ओपनकास्ट कोयला खदानों में संचालित 2500 से अधिक डंपर हैं। यह आंकड़ा पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने के समय का है। अब संख्या बढ़ गई है। कोल इंडिया द्वारा उपयोग किए जाने वाले कुल डीजल की लगभग 65 से 75 प्रतिशत खपत डंपर में होती है। डीजल के उपयोग के स्‍थान पर एलएनजी के उपयोग को 30-40 प्रतिशत तक बदलने से ईंधन की लागत में लगभग 15 प्रतिशत की कमी आने की संभावना है। यदि डंपर सहित सभी भारी अर्थ मूविंग मशीनों को एलएनजी किट लगा देते हैं तो सालाना 500 करोड़ रुपये की बचत का मार्ग प्रशस्त होता है।
कोल इंडिया की एलएनजी पहल की मुख्य बिंदु
डीजल की खपत: कंपनी हर साल खदानों में परिवहन के लिए 4 लाख किलोलीटर से अधिक डीजल उपयोग करती है, जिसकी लागत 3500 करोड़ से ज्यादा है।
पायलट प्रोजेक्ट: गेल (इंडिया) और बीईएमएल के सहयोग से महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड में 100 टन के दो डंपरों में डुअल-फ्यूल सिस्टम लगाए गए थे। वैसे इस अभियान को व्यापक स्वरूप नहीं दिया जा सका।
बचत और लाभ: एलएनजी के इस्तेमाल से डीजल की खपत 30-40 प्रतिशत तक कम हो जाएगी और ईंधन की लागत में लगभग 15% की कमी आएगी।
प्रदूषण नियंत्रण: इस कदम से खदानों में काम करने वाले भारी वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
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