4 जुलाई 2026 की शाम का सुविचार हमें याद दिलाता है कि धन सिर्फ कमाना ही नहीं, उसे संभालना और बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। विदुर नीति में दिए गए चार सूत्र आज भी हर व्यक्ति के लिए उपयोगी हैं। ये सूत्र हमें सिखाते हैं कि मेहनत, समझदारी और संयम से धन स्थायी बनाया जा सकता है।
विदुर नीति में एक श्लोक के माध्यम लक्ष्मी का अधिकारी बनने के लिए चार अहम सूत्र बताए गए हैं। श्लोक इस प्रकार है:
विदुर नीति का पहला सूत्र है – ‘श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति’। अर्थात् लक्ष्मी अच्छे और मंगलकारी कर्मों से आती है। ईमानदारी, परिश्रम और सकारात्मक कार्य करने से धन स्वाभाविक रूप से आकर्षित होता है। जो व्यक्ति दूसरों का भला सोचकर काम करता है, उसे धन की प्राप्ति आसानी से होती है। यह सूत्र बताता है कि धन सिर्फ भाग्य से नहीं, बल्कि सही कर्मों से आता है।
दूसरा सूत्र है – ‘प्रागल्भात् सम्प्रवर्धते’। इसका मतलब है कि धन को बढ़ाने के लिए साहस और सही प्रबंधन जरूरी है। धन को उचित जगह निवेश करना, बचत करना और स्मार्ट तरीके से उपयोग करना चाहिए। जो व्यक्ति अपने धन को सिर्फ खर्च करता है, वह कभी अमीर नहीं बन पाता है। प्रगल्भता यानी समझदारी से धन का उपयोग करने वाला व्यक्ति उसे लगातार बढ़ा सकता है।
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तीसरा सूत्र है – ‘दाक्ष्यात्तु कुरुते मूलं’। चातुर्य यानी चतुराई और समझदारी से धन की जड़ें मजबूत होती हैं। आय और व्यय का सही हिसाब रखना, फालतू खर्च रोकना और हर पैसा सोच-समझकर लगाना बहुत जरूरी है। बिना सोचे खर्च करने वाला व्यक्ति कभी धनवान नहीं रह पाता। चतुराई धन को स्थिर रखती है।
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चौथा और अंतिम सूत्र है संयम। मानसिक, शारीरिक और वैचारिक संयम रखने से धन सुरक्षित रहता है। सुख-सुविधाओं की चाहत में धन का दुरुपयोग ना करें। विदुर कहते हैं कि संयम रखने वाला व्यक्ति कभी कंगाल नहीं होता। जरूरत से ज्यादा खर्च ना करें और भविष्य की सुरक्षा का ध्यान रखें।
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विदुर जी कहते हैं कि धन कोई स्थायी चीज नहीं है। इसे पाने, बढ़ाने और बचाए रखने के लिए सही विचार और कर्म दोनों जरूरी हैं। आज के समय में भी ये सिद्धांत बहुत काम के हैं, क्योंकि ज्यादातर लोग धन कमाते हैं, लेकिन उसे संभाल नहीं पाते हैं।
संक्षिप्त विवरण
नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
विस्तृत बायो परिचय और अनुभव
डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।
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