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जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में रखी गई एक किताब ‘पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जेएंडके’ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. बीजेपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर ‘एकेडमिक जिहाद’ चलाने का आरोप लगाते हुए किताब पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है. बीजेपी का कहना है कि किताब में अलगाववादी नेताओं और उग्रवाद से जुड़े लोगों को सकारात्मक तरीके से पेश किया गया है. जम्मू में शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी विधायक सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि इस किताब में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के टेररिस्ट मकबूल भट्ट को ‘शहीद’ बताया गया है.
उन्होंने कहा कि किताब में सैयद अली शाह गिलानी, मसरत आलम और मीरवाइज उमर फारूक जैसे अलगाववादी नेताओं के विचारों को बढ़ावा दिया गया है. आतंकियों और पत्थरबाजों का महिमामंडन किया गया है, जबकि सुरक्षा बलों और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वालों को नकारात्मक रूप में दिखाया गया है. विवादित किताब में जम्मू-कश्मीर को ‘इंडियन हेल्ड कश्मीर’ और ‘इंडियन ऑक्यूपाइड कश्मीर’ बताया गया है. किताब पर ‘समग्र शिक्षा, जम्मू-कश्मीर’ का लोगो भी मौजूद है. सुनील शर्मा ने कहा, ‘यह इतिहास या शिक्षा नहीं है. यह एकेडमिक सबवर्जन है. यह भारत के खिलाफ एकेडमिक जिहाद है.’
मामले में जम्मू-कश्मीर के LG की कार्रवाई
विवाद बढ़ने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी से इस विवादित किताब को वापस लेने का फैसला किया है. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस मामले में 8 अधिकारियों को सस्पेंड करने और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को हटाने का आदेश दिया है. साथ ही, लाइब्रेरी की किताबों, ब्लैकलिस्ट किए गए लेखकों और पब्लिशर्स से जुड़े विवाद की जांच के भी आदेश दिए हैं. सरकारी सूत्रों के अनुसार, किताब की सभी प्रतियां स्कूलों से वापस मंगाई जा चुकी हैं और निर्देश दिए गए हैं कि यह अब किसी भी सरकारी स्कूल की लाइब्रेरी में उपलब्ध न रहे.
बीजेपी ने मांग की थी कि किताब को तुरंत वापस लिया जाए, इसकी मंजूरी कैसे दी गई इसकी न्यायिक जांच कराई जाए और प्रकाशन व अनुमति प्रक्रिया में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी विधायक सुनील शर्मा ने शिक्षा मंत्री सकीना इटू को बर्खास्त करने की भी मांग की है. उनका आरोप है कि इस तरह की सामग्री को स्कूलों में बांटना राष्ट्र के खिलाफ गंभीर अपराध है. यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर के शिक्षण संस्थानो में पढ़ाई जाने वाली किताबों की लगातार जांच और समीक्षा की जा रही है.
विशेषज्ञ समिति ने किताब को दी थी मंजूरी
पिछले साल जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग ने अरुंधति रॉय, ए.जी. नूरानी, सुमंत्र बोस और अनुराधा भसीन समेत कई लेखकों की 25 किताबों को जब्त कर लिया था. सरकार का आरोप था कि इन किताबों में झूठे नैरेटिव, अलगाववाद और आतंकवाद का महिमामंडन किया गया है. इस आदेश को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है. ताजा विवाद ‘पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जेएंडके’ नाम की किताब को लेकर है. सुनील शर्मा का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने इस किताब की समीक्षा और मंजूरी दी थी, जिसके बाद इसे सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में रखा गया.
सरकार ने इस मामले में विभागीय जांच भी शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किताब के चयन, मंजूरी, खरीद और वितरण में किन अधिकारियों की भूमिका थी. जांच के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी. ‘ग्रेट पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स’ नाम की यह किताब जून महीने में समग्र शिक्षा योजना के तहत सरकारी स्कूलों में भेजी गई थी. शिकायतें मिलने के बाद 3 जुलाई को इसे वापस लेने का आदेश दिया गया. इस बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने अभी तक न तो यह किताब पढ़ी है और न ही इसके बारे में विस्तार से जानकारी ली है. उन्होंने कहा कि किताब की जांच के बाद ही वह इस पर कोई टिप्पणी करेंगे.
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