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टी20 वर्ल्ड कप की मौजूदा चैम्पियन और दुनिया की नंबर-1 टी20 टीम भारत इन दिनों लगातार सवालों के घेरे में है. आयरलैंड दौरे पर लगातार दो हार के बाद इंग्लैंड के खिलाफ भी मिली शिकस्त ने टीम की परेशानियां बढ़ा दी हैं. इन हारों ने सिर्फ खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि कप्तानी, ड्रेसिंग रूम के माहौल और टीम के भीतर तालमेल को लेकर भी बहस छेड़ दी है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ खराब क्रिकेट का नतीजा है या फिर नए कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ पर्याप्त बॉन्डिंग और तालमेल न बन पाना भी इसकी एक अहम वजह है?
दरअसल, श्रेयस अय्यर की कप्तानी की कहानी सामान्य नहीं रही. उन्होंने ढाई साल से अधिक समय तक कोई टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला था. इसके बाद उनकी टीम में वापसी हुई और वापसी के साथ ही उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई. भारतीय क्रिकेट में आमतौर पर कप्तान वही बनता है, जो लंबे समय से टीम का नियमित हिस्सा हो या उपकप्तान की भूमिका निभा रहा हो. इस बार चयनकर्ताओं और मुख्य कोच गौतम गंभीर ने परंपरा से हटकर फैसला लिया.यही फैसला अब चर्चा के केंद्र में है.
क्या ड्रेसिंग रूम में बना असहज माहौल?
भारतीय टीम में हार्दिक पंड्या, शुभमन गिल, अक्षर पटेल और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ी हाल के वर्षों में नेतृत्व समूह का हिस्सा रहे हैं. ऐसे में अचानक लंबे समय तक टीम से बाहर रहे खिलाड़ी को कप्तान बना देना कुछ खिलाड़ियों के लिए चौंकाने वाला फैसला हो सकता है. क्रिकेट में भले ही खिलाड़ी सार्वजनिक तौर पर कुछ न कहें, लेकिन कप्तानी हर किसी का सपना होती है. ऐसे फैसले ड्रेसिंग रूम के माहौल और खिलाड़ियों की मानसिकता पर असर डाल सकते हैं.
मिल ही नहीं पाया साथ काम करने का समय
श्रेयस अय्यर के सामने सबसे बड़ी चुनौती कप्तानी संभालने से पहले ही खड़ी हो गई थी. अफगानिस्तान सीरीज खत्म होने के तुरंत बाद भारतीय टीम इंग्लैंड रवाना हो गई. खिलाड़ियों को नए कप्तान के साथ समय बिताने, उनकी रणनीति समझने या टीम के भीतर तालमेल बनाने का लगभग कोई मौका नहीं मिला. विदेशी परिस्थितियों में सीमित अभ्यास और नए नेतृत्व के साथ कम समय ने मुश्किलें और बढ़ा दीं.
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कप्तानी का अनुभव, पर अंतरराष्ट्रीय चुनौती अलग
यह कहना गलत होगा कि श्रेयस अय्यर को बिना उपलब्धियों के कप्तानी मिली है. आईपीएल 2024 में उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स को खिताब दिलाया और अगले सीजन पंजाब किंग्स को वर्षों बाद फाइनल तक पहुंचाया. उनकी कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों की काफी तारीफ हुई. यही वजह थी कि उन्हें टी20 टीम की कमान सौंपी गई.
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हालांकि फ्रेंचाइजी क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव अलग होता है. यहां सिर्फ कप्तान की रणनीति नहीं, बल्कि पूरे ड्रेसिंग रूम का भरोसा और तालमेल भी उतना ही अहम होता है.
… अब जीत ही बदल सकती है कहानी
लगातार हार के बाद श्रेयस अय्यर पर दबाव बढ़ना तय है. हालांकि उनके पास खुद को साबित करने का समय भी है. भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें भविष्य की योजना के तहत कप्तानी सौंपी है और फिलहाल उनके विकल्प भी सीमित हैं. ऐसे में ट्रेंट ब्रिज में होने वाला तीसरा टी20 मुकाबला श्रेयस के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है.
अगर भारत जीत दर्ज करता है तो कप्तानी को लेकर उठ रहे सवाल कुछ समय के लिए शांत हो सकते हैं… लेकिन अगर हार का सिलसिला जारी रहा, तो यह बहस और तेज होगी कि क्या टीम से लंबे समय तक बाहर रहे खिलाड़ी को सीधे कप्तान बनाना सही फैसला था या फिर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया कुछ और तरीके से होनी चाहिए थी.
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