लॉन्चिंग से पहले विवादों में ओयो का IPO, निकल आया 11 साल पुराना जिन्न – Hindustan

मुख्य बातें

Oyo ipo news: ओयो की पैरेंट कंपनी प्रिज्म (पुराना नाम-ओरावल स्टेज) का आईपीओ विवादों में आ गय है। दरअसल, जोस्टेल कंपनी ने सेबी (SEBI) से प्रस्तावित IPO के लिए जमा किए गए अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) में दी गई जानकारी की जांच करने को कहा है। जोस्टेल ने दावा किया कि ओयो की IPO फाइलिंग में दोनों कंपनियों के बीच चल रहे करीब 11 साल पुराने कानूनी विवाद की अधूरी और चुनिंदा जानकारी दी गई है। जोस्टेल के इन आरोपों के बाद ओयो आईपीओ पर एक बार फिर से संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बता दें कि ओयो का संचालन करने वाली ओरावेल स्टेज का नाम सितंबर 2025 में बदलकर प्रिज्म कर दिया गया था। प्रिज्म 35 से अधिक देशों में 43 ब्रांड संचालित करती है।

जोस्टेल ने दावा किया कि यह मामला सिर्फ एक आम कमर्शियल विवाद नहीं है क्योंकि यह ओयो में लगभग 7% इक्विटी या उससे जुड़ी आर्थिक वैल्यू पर उसके दावे से जुड़ा है। यह विवाद दोनों कंपनियों के बीच असफल अधिग्रहण के बाद शुरू हुआ था। उसने तर्क दिया कि कानूनी कार्यवाही का नतीजा ओयो के कैपिटल स्ट्रक्चर, वैल्यूएशन और मुकदमे से जुड़े जोखिम के बारे में निवेशकों की राय पर असर डाल सकता है, इसलिए IPO डॉक्यूमेंट्स में ज्यादा विस्तृत जानकारी देना जरूरी है। कंपनी ने सेबी से अनुरोध किया है कि IPO प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति देने से पहले वह यह जांच ले कि क्या दी गई जानकारी सेबी एक्ट और ICDR नियमों में बताई गई पूर्णता, निष्पक्षता और अहमियत की जरूरतों को पूरा करती है।

यह विवाद साल 2015 में शुरू हुआ जब ओयो (Oyo) ने जोस्टेल (Zostel) के कामकाज को अपने हाथ में लेने के लिए एक नॉन-बाइंडिंग टर्म शीट पर साइन किए। साल 2021 में एक आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने जोस्टेल के पक्ष में फैसला सुनाया। हालांकि, बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि टर्म शीट नॉन-बाइंडिंग थी और इससे कोई कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार नहीं बनते थे।

जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ जोस्टेल की अपील पर विचार करने से इनकार कर दिया। जोस्टेल के मुताबिक इस विवाद से जुड़ी अपीलें अभी भी दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही हैं और ओयो के IPO डॉक्यूमेंट्स में इनका सही तरीके से खुलासा किया जाना चाहिए।

हाल ही में ओयो की पैरेंट कंपनी प्रिज्म ने 6,650 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए बाजार नियामक सेबी के समक्ष संशोधित मसौदा दस्तावेज दाखिल किए हैं। यह आईपीओ पूरी तरह नए शेयर के इश्यू पर आधारित होगा और इसमें बिक्री पेशकश (ओएफएस) का कोई प्रावधान नहीं है। कंपनी के प्रस्तावित आईपीओ में बिक्री पेशकश का कोई प्रावधान नहीं होने का मतलब है कि सॉफ्टबैंक की एसवीएफ इंडिया होल्डिंग्स, संस्थापक रितेश अग्रवाल, आरए हॉस्पिटैलिटी होल्डिंग्स, माइक्रोसॉफ्ट, एयरबीएनबी, खजानाह, लाइटस्पीड, ग्रीनओक्स कैपिटल और पीक एक्सवी सहित मौजूदा शेयरधारक आईपीओ के जरिये अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।

बता दें कि प्रिज्म ने दिसंबर 2025 में गोपनीय मार्ग व्यवस्था के तहत आईपीओ के मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे। इस व्यवस्था के तहत कंपनी को इश्यू के आकार सहित उसकी प्रमुख जानकारियां सार्वजनिक होने से पहले गोपनीय रखने की सुविधा मिलती है। इसी महीने कंपनी को अपने पहले आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी मिली है। यह आवेदन ऐसे समय आया है, जब कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में वित्तीय प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया है। 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त नौ महीनों में कंपनी का परिचालन राजस्व 6,941 करोड़ रुपये रहा, जो समूचे वित्त वर्ष 2024-25 के 6,259 करोड़ रुपये के राजस्व से अधिक है।

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