भास्कर न्यूज | गढ़वा
एक ओर जहां बिजली आधुनिक जीवन की सबसे बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है, वहीं गढ़वा जिले के 17 प्रखंडों के 466 टोले आज भी अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। हकीकत यह है कि सैकड़ों टोलों तक अब तक बिजली की रोशनी नहीं पहुंच सकी है। इनमें कई ऐसे टोले भी शामिल हैं जो सर्वेक्षण के दौरान छूट गए थे, जबकि कुछ स्थानों पर बाद में नई आबादी बस गई। इन कारणों से करीब 35-40 हजार लोगों को आज भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है। जिले में सबसे अधिक प्रभावित प्रखंडों में बड़गड़, भंडरिया, चिनियां और रमकंडा शामिल हैं। इन इलाकों के लोग वर्षों से विद्युतीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हो सकी हैं। बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई, ग्रामीणों की आजीविका, स्वास्थ्य सेवाओं और छोटे कारोबारों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। गर्मी और बरसात के मौसम में स्थिति और भी कठिन हो जाती है। बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले का कोई भी गांव अब विद्युतीकरण से वंचित नहीं है, लेकिन गांवों के भीतर बसे कई टोले अभी भी बिजली से नहीं जुड़ पाए हैं। चिनियां प्रखंड के सिद्दे, पाल्हे, पूरेगाड़ा, चपकली और मसरा गांव के टोले अब भी बिजली का इंतजार कर रहे हैं। वहीं भंडरिया प्रखंड के चपलसी, हरता, बिजका और लिदकी गांवों के कई टोले अंधेरे में हैं। इसी तरह बड़गड़ प्रखंड के सनेया, चेमो, टोटकी, मदगढ़ी, खैरा, रामर, कोरवाडीह, भजना, चपला, संघाली, कुटकू, सरूअत, बिंजपुर, तूरेर, तुमेरा, टेहरी, बरकोल कला और सालो गांवों के टोले भी अब तक विद्युतीकरण से वंचित हैं। रमकंडा प्रखंड के बिराजपुर और सुली गांव के कई टोलों में भी बिजली नहीं पहुंची है। इन क्षेत्रों के ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में भी उन्हें लालटेन, ढिबरी और सोलर लैंप के सहारे रात गुजारनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली नहीं होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। मोबाइल चार्ज करने से लेकर पेयजल, सिंचाई और छोटे घरेलू कार्यों तक में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार सरकारी योजनाओं का लाभ भी बिजली के अभाव में पूरी तरह नहीं मिल पाता। लोगों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक उनके टोले रोशनी से नहीं जुड़ सके हैं। अक्टूबर तक पूरा होगा काम बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता असगर अली ने बताया कि जिले के 17 प्रखंडों के 466 टोलों में विद्युतीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। विभाग का लक्ष्य अक्टूबर महीने तक सभी शेष टोलों तक बिजली पहुंचाने का है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर बिजली के पोल लगाए जा चुके हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में पोल पहुंचाने का काम जारी है। लगभग 150 टोलों में विद्युतीकरण का कार्य अंतिम चरण में है। उन्होंने स्वीकार किया कि वन विभाग के क्षेत्र में आने वाले इलाकों में अनुमति और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कार्य की गति कुछ धीमी है, लेकिन तय समय सीमा के भीतर सभी शेष टोलों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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