प्रिलिम्स के लिये: इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन, ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी, क्वाड, सप्लाई चेन रेजिलिएंस इनिशिएटिव, भारत-ऑस्ट्रेलिया रिन्यूएबल एनर्जी पार्टनरशिप
मेन्स के लिये: भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध और व्यापक रणनीतिक साझेदारी, भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय साझेदारी को बढ़ाने के उपाय
स्रोत: पीआईबी
भारत के प्रधानमंत्री ने तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन (जुलाई 2026) के लिये ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की। यह यात्रा इंडो-पैसिफिक में सहयोग को गहरा करने, ऊर्जा और महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने, रक्षा सहयोग और एक सतत रणनीतिक साझेदारी के निर्माण पर केंद्रित थी। 
राजनीतिक सद्भावना को संरचनात्मक स्थायित्व में परिवर्तित करने के लिये भारत और ऑस्ट्रेलिया को पारंपरिक टैरिफ वार्ताओं से आगे बढ़ते हुए गैर-टैरिफ बाधाओं को व्यवस्थित रूप से समाप्त करना चाहिये तथा घरेलू महत्त्वपूर्ण खनिज परिष्करण अवसंरचना में संयुक्त निवेश करना चाहिये। पश्चिमी गठबंधन प्रणालियों और रणनीतिक स्वायत्तता के मध्य रणनीतिक अंतर को स्थानीयकृत समुद्री भार-साझेदारी के माध्यम से सक्रिय रूप से कम करके, दोनों लोकतांत्रिक देश सफलतापूर्वक एक बहुध्रुवीय, सुरक्षित एवं सुदृढ़ हिंद-प्रशांत व्यवस्था को स्थापित कर सकते हैं।
दृष्टि मेन्स प्रश्न:
प्रश्न: भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध पारस्परिक रणनीतिक उपेक्षा से विकसित होकर एक बढ़ती हुई संस्थागत व्यापक रणनीतिक साझेदारी में परिवर्तित हुए हैं।
1. भारत-ऑस्ट्रेलिया तीसरे वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन 2026 के प्रमुख परिणाम क्या थे?
इस शिखर सम्मेलन में JDDSC, MSCR, ऊर्जा सुरक्षा संयुक्त वक्तव्य और PACTS को अपनाया गया। इसके साथ ही असैन्य परमाणु समझौते को क्रियान्वित किया गया तथा रक्षा, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, शिक्षा, अंतरिक्ष और अनुकूल आपूर्ति शृंखलाओं के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया गया।
2. समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप (MSCR) क्या है?
MSCR (2026) हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सूचना साझाकरण, क्षमता विकास, क्षमता निर्माण और परिचालन समन्वय को सुदृढ़ करने हेतु भारत-ऑस्ट्रेलिया का एक ढाँचा है।
3. साइबर, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति शृंखलाओं पर ऑस्ट्रेलिया-भारत साझेदारी (PACTS) क्या है?
PACTS (2026) साइबर सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, डिजिटल रेज़िलीएंस, रक्षा अनुसंधान तथा महत्त्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं के विविधीकरण में सहयोग को सुदृढ़ करता है।
4. भारत-ऑस्ट्रेलिया असैन्य परमाणु समझौते का क्या महत्त्व है?
वर्ष 2014 के असैन्य परमाणु समझौते को 2026 में एक प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से क्रियान्वित किया गया, जिसके तहत अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा उपायों के अंतर्गत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिये भारत को दीर्घकालिक ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम आपूर्ति संभव होती है।
5. भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
प्रमुख चुनौतियों में रणनीतिक मतभेद, व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) की लंबित वार्ताएँ, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) संबंधी बाधाएँ, द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन, चीन-आधारित महत्त्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण पर निर्भरता तथा ऑस्ट्रेलिया में अलगाववादी (खालिस्तानी) तत्त्वों से संबंधित तनाव शामिल हैं।
प्रश्न. निम्नलिखित में से किस एक समूह में चारों देश G-20 के सदस्य हैं? (2020)
(a) अर्जेंटीना, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की
(b) ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और न्यूज़ीलैंड
(c) ब्राज़ील, ईरान, सऊदी अरब और वियतनाम
(d) इंडोनेशिया, जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया
उत्तर: (a)
प्रश्न. भारत-प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन की महत्त्वाकांक्षाओं का मुकाबला करना नई त्रि-राष्ट्र साझेदारी AUKUS का उद्देश्य है। क्या यह इस क्षेत्र में मौजूदा साझेदारी का स्थान लेने जा रहा है? वर्तमान परिदृश्य में, AUKUS की शक्ति और प्रभाव की विवेचना कीजिये। (2021)
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस
भारतीय सशस्त्र बल अग्निपथ योजना के अंतर्गत प्रारंभिक रूप से निर्धारित 25% सेवा-प्रतिधारण सीमा से अधिक अग्निवीरों की सेवा में बनाए रखने के प्रतिशत में महत्त्वपूर्ण वृद्धि की मांग कर रहे हैं।
अग्निपथ योजना में सुधार हेतु सख्ती के साथ राजकोषीय गणना से रणनीतिक मानव पूंजी दृष्टिकोण में संक्रमण की आवश्यकता है। अनुकूलनशील प्रतिधारण दरों को अपनाकर भारत युवा, बेहतर सेना को बनाए रखने के साथ-साथ आधुनिक, प्रौद्योगिकी-संचालित युद्ध के लिये आवश्यक गहन सामरिक विशेषज्ञता को संरक्षित करने के अपने दोहरे उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है।
दृष्टि मेन्स प्रश्न:
प्रश्न. आधुनिक युद्ध के लिये तकनीकी रूप से कुशल कर्मियों के साथ-साथ युवा और मज़बूत सैन्य शक्ति की भी आवश्यकता होती है। इस संदर्भ में अग्निपथ योजना के तहत अल्पकालिक सैन्य भर्ती से संबंधित चुनौतियों का विश्लेषण कीजिये।
1. अग्निपथ योजना क्या है?
अग्निपथ योजना, जिसे जून 2022 में लॉन्च किया गया था, एक पूर्ण-भारत, योग्यता-आधारित भर्ती कार्यक्रम है, जो सेना, नौसेना और वायु सेना में अधिकारी से नीचे के कार्मिकों (PBOR) को चार-वर्षीय कार्यकाल के लिये नामांकित करने के लिये है।
2. अग्निवीरों के लिये मौजूदा प्रतिधारण नीति क्या है?
वर्तमान में, प्रत्येक अग्निवीर बैच के 25% तक को केंद्रीकृत, पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ संगठनात्मक मानदंडों के आधार पर नियमित कैडर में नामांकित किया जा सकता है।
3. सशस्त्र बल उच्च अग्निवीर प्रतिधारण दरों की मांग क्यों कर रहे हैं?
उच्च प्रतिधारण की मांग कार्मिकों की कमी को रोकने, संस्थागत अनुभव को संरक्षित करने, विशिष्ट प्रशिक्षण में निवेश को वसूल करने और तकनीकी रूप से उन्नत सैन्य प्लेटफॉर्मों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिये की जाती है।
4. चार वर्षों के बाद बाहर निकलने वाले अग्निवीरों को क्या लाभ प्रदान किये जाते हैं?
बाहर निकलने वाले अग्निवीरों को लगभग ₹11.71 लाख का कर-मुक्त सेवा निधि पैकेज, एक कौशल प्रमाण-पत्र, सेवा के दौरान ₹48 लाख की गैर-योगदान जीवन बीमा कवरेज और कुछ CAPF (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) तथा राज्य पुलिस बलों में भर्ती की वरीयता प्राप्त होती है।
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