राजस्थान के भीलवाड़ा-बांसवाड़ा में 7 प्रसूताओं की मौत – Hindustan

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में सिर्फ छह दिनों के भीतर सात प्रसूताओं की मौत से हड़कंप मच गया है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) के ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच (कल्चर टेस्ट) रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कहीं ऑपरेशन थिएटर में फैले संक्रमण या उपकरणों के इस्तेमाल में लापरवाही तो इन मौतों की वजह नहीं बनी?
उधर, बांसवाड़ा के सरकारी अस्पताल में भी शुक्रवार सुबह महज दो घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हो गई। दोनों महिलाओं ने पहली बार बच्चे को जन्म दिया था। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने पूरे प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के एमसीएच में जुलाई के पहले ही सप्ताह में पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। सभी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
शुक्रवार को पोटला निवासी 32 वर्षीय संगीता जीनगर की भी मौत हो गई। उनकी मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। इस साल मार्च से अब तक अस्पताल में कुल नौ प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जिनमें से पांच मौतें सिर्फ जुलाई में हुई हैं।
सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब एमसीएच के ऑपरेशन थिएटर की कल्चर टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई। रिपोर्ट सामने आने के बाद अस्पताल की संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल में रोजाना 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं, जबकि नियमित उपयोग के लिए केवल पांच सर्जिकल सेट और इमरजेंसी के लिए तीन अतिरिक्त सेट उपलब्ध हैं।
चिकित्सकीय नियमों के मुताबिक किसी भी सर्जिकल सेट को दोबारा इस्तेमाल से पहले पूरी तरह स्टरलाइज करना जरूरी होता है, जिसमें कम से कम तीन घंटे लगते हैं। लेकिन ऑपरेशन का दबाव अधिक होने के कारण उपकरणों के पर्याप्त रूप से स्टरलाइज न होने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने अभी तक इसे मौतों की वजह मानने से इनकार किया है।
महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ का कहना है कि अस्पताल में किसी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आई है। उनके अनुसार अधिकांश मरीज पहले से गंभीर स्थिति में दूसरे अस्पतालों से रेफर होकर आते हैं और चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण मौतें होती हैं।
एमसीएच प्रबंधन का कहना है कि मृत महिलाओं की मौत पल्मोनरी एम्बोलिज्म, एस्पिरेशन, गंभीर एनीमिया, सीजर पीआईएच, एक्लेम्प्सिया और अन्य प्रसूति संबंधी जटिलताओं के कारण हुई है।
भीलवाड़ा की घटना के बीच बांसवाड़ा से भी चौंकाने वाली खबर सामने आई। शुक्रवार सुबह दो घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हो गई।
सवनिया निवासी लक्ष्मी गंभीर एनीमिया से पीड़ित थीं, जबकि कानेला निवासी लीला की मौत उच्च रक्तचाप की जटिलताओं के कारण बताई जा रही है। दोनों महिलाओं ने पहली बार संतान को जन्म दिया था।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच समिति बनाई है। पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में इस्तेमाल हुए तीन इंजेक्शनों के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं। सीएमएचओ खुशपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, गायनेकोलॉजिस्ट और अन्य विशेषज्ञों की टीम को जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्पताल से जुड़े सूत्रों का दावा है कि हाल के दिनों में दो अन्य महिलाओं की भी मौत हुई है। इनमें एक महिला की ऑपरेशन के बाद और दूसरी गर्भवती की आईसीयू में इलाज के दौरान मौत होने की बात कही जा रही है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इन दोनों मामलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
राजस्थान में यह पहला मामला नहीं है। मई में कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत ने स्वास्थ्य विभाग को झकझोर दिया था। वहीं जून में बीकानेर में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद छह प्रसूताओं की किडनी फेल होने का मामला सामने आया था, जिनमें से दो महिलाओं की बाद में मौत हो गई थी।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने सरकारी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, सर्जिकल उपकरणों की उपलब्धता, स्टरलाइजेशन प्रक्रिया और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे साफ हो सकेगा कि इन मौतों के पीछे चिकित्सकीय जटिलताएं जिम्मेदार थीं या फिर स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई बड़ी चूक।
सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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