अरबों साल पहले खत्म हो चुके तारे आज भी भेज रहे संदेश! नई खोज ने बढ़ाया रोमांच – India.Com

कल्पना कीजिए कि कोई तारा अरबों साल पहले विस्फोट होकर खत्म हो गया हो, लेकिन उसकी आखिरी ‘आवाज’ आज भी पूरे ब्रह्मांड में गूंज रही हो. सुनने में यह कहानी जैसा लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा सचमुच हो सकता है. space.com में छपी खबर के अनुसार, जापान के दुनिया के सबसे बड़े न्यूट्रिनो डिटेक्टर सुपर-कामिओकांडे ने ऐसे बेहद कमजोर संकेत दर्ज किए हैं, जिन्हें वैज्ञानिक डिफ्यूज सुपरनोवा न्यूट्रिनो बैकग्राउंड का पहला मजबूत संकेत मान रहे हैं. अगर भविष्य में इसकी पुष्टि हो जाती है, तो यह खोज बताएगी कि अरबों वर्षों से सुपरनोवा विस्फोटों के दौरान निकले रहस्यमयी न्यूट्रिनो आज भी अंतरिक्ष में मौजूद हैं और ब्रह्मांड के इतिहास की कहानी अपने भीतर समेटे हुए हैं.

न्यूट्रिनो ब्रह्मांड के सबसे अधिक संख्या में मौजूद कणों में से एक हैं, लेकिन इन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल होता है. इनका द्रव्यमान बहुत कम होता है और इन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता, इसलिए ये लगभग हर चीज के आर-पार निकल जाते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार हर सेकंड करीब 100 ट्रिलियन न्यूट्रिनो हमारे शरीर से होकर गुजरते हैं, लेकिन हमें इसका कोई एहसास नहीं होता. पूरी जिंदगी में शायद ही कोई एक न्यूट्रिनो हमारे शरीर के किसी परमाणु से टकराएय यही वजह है कि इन्हें ‘कॉस्मिक घोस्ट’ यानी ब्रह्मांड के भूत जैसे कण कहा जाता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि इन्हीं कणों के जरिए ब्रह्मांड की उन घटनाओं को समझा जा सकता है, जहां सामान्य रोशनी भी पूरी जानकारी नहीं दे पाती.

यह शोध उन विशाल तारों से जुड़ा है जो अपने जीवन के अंत में सुपरनोवा विस्फोट करते हैं. जब ऐसे तारों के भीतर ऊर्जा बनने की प्रक्रिया रुक जाती है, तो उनका अपना गुरुत्वाकर्षण उन्हें भीतर की ओर समेट देता है और फिर एक जबरदस्त विस्फोट होता है. इस दौरान प्रकाश के साथ बड़ी मात्रा में न्यूट्रिनो भी निकलते हैं. तारे का बचा हुआ हिस्सा आगे चलकर न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल बन सकता है. जापान के सुपर-कामिओकांडे डिटेक्टर में मौजूद करीब 50 हजार टन अति-शुद्ध पानी में जब कोई न्यूट्रिनो टकराता है, तो बहुत हल्की चेरेनकोव रोशनी पैदा होती है. वैज्ञानिकों ने लगभग 14 वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन किया और उन्हें ऐसा संकेत मिला, जो DSNB की वैज्ञानिक भविष्यवाणियों से काफी मेल खाता है.

वैज्ञानिक अभी इस परिणाम को शुरुआती लेकिन बेहद मजबूत संकेत मान रहे हैं. आने वाले समय में सुपर-कामिओकांडे और उसके अधिक उन्नत संस्करण हाइपर-कामिओकांडे की मदद से और अधिक आंकड़े जुटाए जाएंगे, ताकि इस खोज की पूरी तरह पुष्टि की जा सके. यदि ऐसा होता है, तो वैज्ञानिक पहली बार अरबों वर्षों में हुए असंख्य सुपरनोवा विस्फोटों के संयुक्त प्रभाव को सीधे न्यूट्रिनो के माध्यम से समझ पाएंगे. इससे यह जानने में भी मदद मिलेगी कि भारी तत्व कैसे बने, ब्लैक होल और न्यूट्रॉन तारे कैसे जन्म लेते हैं और ब्रह्मांड का विकास किस तरह हुआ.

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नंदन सिंह ने पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2015 में ईनाडु डिजिटल यानी ईटीवी (हैदराबाद) से की. यहां इन्होंने बतौर कॉपी राइटर करीब 10 महीनों तक काम किया. सीखने … और पढ़ें
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