राम मंदिर निर्माण समिति की अहम बैठक, अयोध्या संग्रहालय में दिखेगी राम-वनगमन की कहानी – AajTak

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राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने अयोध्या में आयोजित दो दिवसीय विशेष बैठक के दौरान 100 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले नए संग्रहालय की गैलरी स्क्रिप्ट और श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं के विस्तृत खाके को अंतिम रूप दिया. इस महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने मंदिर निर्माण पर अब तक लगभग 1600 से 1800 रुपये खर्च होने की आधिकारिक जानकारी साझा की. उन्होंने श्रद्धालुओं की संख्या घटने के दावों को अफवाह बताते हुए कहा कि भक्तों के मन में व्यवस्था या आरती को लेकर कोई शिकायत नहीं है.

अयोध्या में रविवार और शनिवार को हुई निर्माण समिति की बैठक में मुख्य रूप से संग्रहालय की गैलरी की स्क्रिप्ट फाइनल की जा रही है. इस संग्रहालय की एक विशेष गैलरी में भगवान राम और उनका नदियों से क्या रिश्ता रहा व वे कैसे जुड़े, ये पूरी तरह दिखाया जाएगा.
संग्रहालय पर खर्च होंगे लगभग 100 करोड़

इसके साथ ही एक अन्य गैलरी में भगवान राम की किससे कहां भेंट हुई और उनका क्या लक्ष्य था, इस पर विस्तार से काम किया जाएगा. संग्रहालय की एक सीधी बड़ी दीवार पर भगवान राम के वन गमन की पूरी कहानी चित्रों और माध्यमों से प्रदर्शित की जाएगी, जिसका कुल खर्च लगभग 100 करोड़ रुपये के अंदर होगा.

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि संग्रहालय में एंट्री के लिए कोई टिकट लगेगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला अभी राम मंदिर ट्रस्ट को ही करना है.
‘श्रद्धालुओं को कोई शिकायत नहीं’
उन्होंने श्रद्धालुओं की संख्या घटने की बात को अफवाह बताते हुए कहा कि वो खुद भक्तों से लगातार बात करते रहते हैं और उनके मन में राम के प्रति आस्था, अर्चना या आरती को लेकर एक भी शिकायत नहीं है. मंदिर निर्माण में कुल 1,600 से 1,800 करोड़ रुपये का खर्च आ चुका है. नृपेंद्र मिश्रा ने 6 जुलाई को हुई बैठक के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में वह शामिल नहीं थे, लेकिन आगामी बैठक में निर्माण संबंधी विषय होने पर वो बैठक में अवश्य आएंगे.

मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति पर बोलते हुए निर्माण समिति के अध्यक्ष ने साफ किया कि जो भी सीईओ नियुक्त होंगे, वो पूरी तरह ट्रस्ट के अंतर्गत ही काम करेंगे. ये ट्रस्ट को ही तय करना होगा कि व्यवस्थाओं को कैसे चलाना है, क्योंकि सब कुछ ट्रस्ट के ही अधीन है. ट्रस्ट जैसा डेलीगेशन सीईओ को सौंपेगा, उसी के अनुसार सीईओ मंदिर में आगे का स्टाफ नियुक्त करेंगे और व्यवस्थाएं बनाएंगे.
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