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वाराणसी के ज्ञानवापी और श्रृंगार गौरी विवाद में मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने की सुप्रीम कोर्ट की पहल को बड़ा झटका लगा है. मंगलवार को वाराणसी के मध्यस्थता केंद्र में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष पहुंचे, लेकिन बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची. दोनों पक्षों ने स्पष्ट कर दिया कि वे इस मामले का समाधान मध्यस्थता के बजाय अदालत के फैसले से चाहते हैं.
यह बैठक सुप्रीम कोर्ट की ‘सुप्रीम कोर्ट एक्शन फॉर मेडिएटेड एडजुडिकेशन एंड डिस्प्यूट्स हार्मोनाइजेशन अक्रॉस नेशन’ (SAMADHAN SAMAROH) पहल के तहत आयोजित की गई थी. इस पहल का उद्देश्य लंबित मामलों का आपसी सहमति से समाधान निकालने की संभावना तलाशना है. इसी क्रम में 21 से 23 अगस्त तक प्रस्तावित विशेष लोक अदालत से पहले पक्षकारों को मध्यस्थता केंद्र बुलाया गया था.
मुस्लिम पक्ष ने बताई यह वजह
मध्यस्थता विफल होने के बाद अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से अधिवक्ता तौहीद खान ने कहा कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को लेकर अश्विनी उपाध्याय की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने निर्देश दिया है कि जब तक इस मामले पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक मेरिट के आधार पर कोई निर्णय नहीं लिया जाए और न ही नए मामलों पर आगे बढ़ा जाए. उनका कहना था कि इसी कारण वाराणसी जिला जज की ओर से भी कोई नया आदेश पारित नहीं किया जा रहा है.
तौहीद खान ने यह भी कहा कि मूल वाद लॉर्ड स्वयंभू बनाम इंतजामिया कमेटी की पत्रावली भी अभी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में मध्यस्थता की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती. वहीं, हिंदू पक्ष ने भी मध्यस्थता स्वीकार करने से इनकार कर दिया. हिंदू पक्ष के वकीलों, वादी महिलाओं और पैरोकारों का कहना था कि उन्हें मंदिर के स्थान पर कोई दूसरा समाधान स्वीकार नहीं है.
हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने मध्यस्थता से इनकार कर दिया है. उन्होंने बताया कि हिंदू पक्ष ने भी मध्यस्थता केंद्र के सामने अपना पक्ष रखा. मदन मोहन यादव के अनुसार, हिंदू पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी परिसर पर मुस्लिम पक्ष का अतिक्रमण है और उन्हें वहां से हटना चाहिए, ताकि मूल ज्योतिर्लिंग स्थल पर भव्य काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण हो सके.
हिंदू पक्ष का यह भी कहना है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई की सर्वे रिपोर्ट इस बात का बड़ा प्रमाण है कि वहां पहले मंदिर था. उनका दावा है कि मुस्लिम पक्ष के पास अपने दावों के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं है. इसलिए वे मध्यस्थता के बजाय अदालत के फैसले का इंतजार करेंगे.
अदालत के फैसले पर दोनों पक्षों की नजर
ज्ञानवापी विवाद लंबे समय से अदालत में विचाराधीन है. यह विवाद वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की धार्मिक प्रकृति को लेकर है. हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल काल में मंदिर को तोड़कर वहां मस्जिद बनाई गई थी. वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह वैध वक्फ संपत्ति है और हिंदू पक्ष के दावों को स्वीकार नहीं किया जा सकता.
मध्यस्थता केंद्र में बातचीत विफल होने के बाद अब दोनों पक्षों ने साफ कर दिया है कि वे अदालत के फैसले का ही इंतजार करेंगे. उनका कहना है कि जो भी अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट और संबंधित अदालतों से आएगा, वही उन्हें स्वीकार होगा.
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