ऑफिस के दो लड़के, एक बना पति दूसरा बना प्रेमी… फिर चलती ट्रेन में शूटआउट की कहानी ऐसे सुलझी – AajTak

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साल 2017. सरकारी नौकरी का पहला दिन. बिजली विभाग में कई नए चेहरे एक साथ अपनी नई पारी शुरू कर रहे थे. उन्हीं चेहरों में तीन नाम भी थे देव कुमार गुंजन, स्मिता कुमारी और अजीत कुमार. किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक ही विभाग में नौकरी शुरू करने वाले ये तीन लोग करीब नौ साल बाद बिहार के सबसे चर्चित हत्याकांडों में एक साथ चर्चा में होंगे.
दफ्तर में रोज मुलाकात होती थी. साथ काम, बातचीत और एक-दूसरे को समझने का सिलसिला चलता रहा. फिर वक्त बदला. 2018 में देव कुमार गुंजन और स्मिता कुमारी ने शादी कर ली. परिवार बसा. कुछ साल बाद उनके घर एक बेटी ने जन्म लिया. बाहर से देखने पर सब कुछ सामान्य था. दोनों सरकारी नौकरी में थे और जिंदगी अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी. लेकिन पुलिस की जांच के मुताबिक, कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी. समय के साथ रिश्तों की दिशा बदलने लगी. उसी विभाग का एक पुराना साथी फिर स्मिता कुमारी की जिंदगी में पहले से ज्यादा करीब आने लगा. पुलिस का दावा है कि यह नजदीकी धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई और यहीं से शुरू हुई एक ऐसी कथित साजिश, जिसका अंत चलती ट्रेन में हुई गोलीबारी पर हुआ.
पत्नी से मिलने निकला था, लेकिन लौटकर नहीं आया
11 जून 2026 की सुबह देव कुमार गुंजन अपनी पत्नी से मिलने के लिए निकले थे. वह जमुई के मलयपुर में ग्रेड-1 टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थे, जबकि उनकी पत्नी स्मिता कुमारी सुपौल में मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) के पद पर तैनात थीं. मानसी से सुपौल जाने वाली जनसाधारण एक्सप्रेस बदलाघाट स्टेशन के पास पहुंची ही थी कि चलती ट्रेन में देव कुमार गुंजन को गोली मार दी गई. ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई. घायल हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. रेल क्षेत्र में घटना होने के कारण मानसी रेल थाना में भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. शुरुआत में पूरी घटना ट्रेन में लूटपाट के दौरान हुई हत्या जैसी लग रही थी.
पत्नी ने कहा- लूटपाट में चली गई जान
घटना के बाद सबसे ज्यादा सदमे में दिख रही थीं देव कुमार गुंजन की पत्नी स्मिता कुमारी. उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति ट्रेन में लूटपाट का शिकार हुए थे और विरोध करने पर बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी. शुरुआती जांच भी इसी दिशा में आगे बढ़ी. लेकिन कुछ सवाल ऐसे थे जिनके जवाब पुलिस को नहीं मिल रहे थे. आखिर लुटेरों ने सिर्फ गोली क्यों मारी? क्या यह सिर्फ लूट थी या इसके पीछे कोई और वजह छिपी थी? इन्हीं सवालों ने जांच का रुख बदल दिया.
मोबाइल ने खोला सबसे बड़ा राज
रेल पुलिस ने बरौनी रेल अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) बनाया. बाद में एसटीएफ को भी जांच में शामिल किया गया. इस बार जांच केवल घटनास्थल तक सीमित नहीं रही. पुलिस ने मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन, डिजिटल गतिविधियों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की बारीकी से जांच शुरू की. यहीं से कहानी की पहली बड़ी परत खुली. पुलिस के मुताबिक, देव कुमार गुंजन की पत्नी स्मिता कुमारी और उनके पुराने सहकर्मी अजीत कुमार के बीच लगातार संपर्क था. दोनों वर्षों पहले एक साथ नौकरी कर चुके थे.
2017 की दोस्ती, 2023 में फिर बढ़ीं नजदीकियां
जांच में सामने आया कि वर्ष 2017 में देव कुमार गुंजन, स्मिता कुमारी और अजीत कुमार ने एक साथ विद्युत विभाग में नौकरी शुरू की थी. शुरुआती पोस्टिंग सीतामढ़ी में थी. एक साल बाद देव और स्मिता ने शादी कर ली. बाद में तीनों के तबादले अलग-अलग जगह हो गए. देव कुमार गुंजन जमुई चले गए. अजीत कुमार की पोस्टिंग नालंदा जिले के एकंगरसराय में हुई. वर्ष 2023 में स्मिता कुमारी का चयन मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) के पद पर हुआ और उनकी पोस्टिंग सुपौल में हो गई. पुलिस का दावा है कि इसी दौरान स्मिता और अजीत फिर एक-दूसरे के करीब आए और दोनों के बीच प्रेम संबंध शुरू हो गया.
जब पति ‘रास्ते की रुकावट’ बन गया
रेल पुलिस के अनुसार, प्रेम संबंध आगे बढ़ने के साथ देव कुमार गुंजन दोनों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गए. जांच में आरोप है कि इसके बाद दोनों ने उन्हें रास्ते से हटाने की योजना बनाई. इसके लिए जहानाबाद के घोसी क्षेत्र के रहने वाले राजू कुमार उर्फ धीरज से संपर्क किया गया. पुलिस का कहना है कि चार लाख रुपये में हत्या की सुपारी तय हुई. भुगतान कथित तौर पर ऑफलाइन किया गया ताकि कोई डिजिटल रिकॉर्ड न रहे. जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित शूटर ने कई दिनों तक देव कुमार गुंजन की गतिविधियों पर नजर रखी. वह कब ड्यूटी पर जाते हैं, कब लौटते हैं और कब पत्नी से मिलने निकलते हैं, इसकी जानकारी जुटाई गई. 11 जून को मौका मिला. देव कुमार गुंजन ट्रेन में सफर कर रहे थे. बदलाघाट स्टेशन के पास कथित शूटर ने चलती ट्रेन में उन्हें गोली मार दी. इसके बाद पूरी घटना को ट्रेन में हुई लूट जैसा दिखाने की कोशिश की गई. पुलिस का कहना है कि यदि जांच केवल प्रत्यक्ष बयानों तक सीमित रहती तो यह मामला शायद ट्रेन में लूटपाट की घटना बनकर रह जाता. लेकिन सबूत एक अलग कहानी बता रहे थे. मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को जोड़ते-जोड़ते जांच टीम कथित तौर पर उस साजिश तक पहुंच गई, जिसकी शुरुआत वर्षों पहले एक सरकारी दफ्तर से हुई थी.
तीन गिरफ्तारियां और बड़ा दावा
संयुक्त कार्रवाई में रेल जिला कटिहार की एसआईटी और एसटीएफ ने स्मिता कुमारी, अजीत कुमार और कथित शूटर राजू कुमार उर्फ धीरज को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस का दावा है कि पूछताछ में तीनों ने अपनी-अपनी भूमिका स्वीकार की है. हालांकि इन दावों की पुष्टि न्यायालय में सुनवाई और साक्ष्यों की जांच के बाद ही होगी. कटिहार रेल मंडल के एसपी हरिशंकर कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के आधार पर पूरे मामले का खुलासा हुआ. उनके अनुसार, शुरुआती दौर में मामले को लूट के दौरान हुई हत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी, लेकिन जांच में कथित प्रेम संबंध, सुपारी और हत्या की साजिश के साक्ष्य सामने आए.
 
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