वैकल्पिक हेंडिंग उपभोक्ता को नई कार या 20 लाख रुपये दे कंपनी : आयोग
क्रॉसर :
रायपुर में ई20 ईंधन से खराब हुआ था कार का इंजन
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ई20 ईंधन से कार का इंजन खराब होने का मामला सामने आया है। इस पर जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की बेंच ने मारुति सुजुकी को उपभोक्ता को नई कार देने या 20,50,288 रुपये लौटाने का आदेश दिया है। मामले में कंपनी के अधिकृत डीलर नवेरा मेंटेनो स्काई ऑटो मोबाइल्स को दोषी ठहराया गया है। बेंच ने सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापारिक व्यवहार के लिए मारुति को 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को उसी मॉडल की नई ई-20 आधारित कार देने या वाहन की कीमत बीमा, आरटीओ समेत कुल 20,50,288 रुपये लौटाने का निर्देश दिया है। साथ ही एक लाख रुपये मानसिक प्रताड़ना, 10 हजार वाद व्यय और भुगतान तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है। वहीं, मारुति की ओर से आयोग के आदेश को चुनौती देने की बात कही गई है。
रायपुर निवासी डॉ. देवड़ा ने तीन जून 2024 को ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड 1.5 सीवीटी कार 18.29 लाख रुपये में खरीदी थी। बीमा, आरटीओ समेत वाहन पर कुल 20,50,288 रुपये खर्च हुए। वारंटी में 21,913 किलोमीटर चलने के बाद 11 नवंबर 2024 को कार के इंजन में खराबी के बारे में पता चला। इस पर देवड़ा कार सर्विस सेंटर ले गए। पहली बार पेट्रोल टैंक खाली कर साफ किया गया और पेट्रोल डालकर वाहन लौटाया। कुछ दूरी चलने के बाद इंजन बंद हो गया। दूसरी बार कंपनी ने स्वीकार किया कि टैंक साफ नहीं था। केमिकलयुक्त ईंधन रह गया था। तीसरी बार भी टैंक, पाइपलाइन, फिल्टर में सफेद परत और तरल पदार्थ मिला। चौथी बार खराबी पर उसे ईवी मोड ने चलाना बंद कर दिया, जबकि पांचवीं बार इंजन ठप हो गया था।
आयोग ने आदेश में कहा कि वाहन निर्माता यह जानते हुए भी कि केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा 20 प्रतिशत तक बढ़ाई जा चुकी है। देशभर में ई20 पेट्रोल उपलब्ध कराया जा रहा है, फिर भी उपभोक्ता को ऐसा वाहन बेचा गया, जिसका इंजन ई20 ईंधन के अनुरूप नहीं था।
सुनवाई के दौरान कंपनी ने तर्क दिया कि कार में किसी प्रकार का दोष नहीं था और समस्या मिलावटी या गुणवत्ता प्रभावित पेट्रोल से हुई। कंपनी ने यह भी कहा कि वाहन की वारंटी में मरम्मत की गई। कई बार पेट्रोल टैंक साफ कर वाहन उपभोक्ता को सौंपा गया। हालांकि, आयोग ने उपलब्ध दस्तावेज, लैब रिपोर्ट और वाहन की बार-बार खराबी के आधार पर इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना।
मारुति सुजुकी इंडिया ने बयान में कहा कि आयोग के आदेश की जानकारी मिली है। हालांकि, कार पूरी तरह से ई20 अनुकूल थी और ग्राहक के वाहन से निकाले गए ईंधन में मिलावट के सबूत मिले हैं। उचित उच्च मंच के समक्ष इस विवादित आदेश को चुनौती देने के लिए कंपनी कदम उठाएगी। मजबूत इंजीनियरिंग, प्रक्रियाओं और प्रणालियों के माध्यम से गुणवत्ता, सुरक्षा और ग्राहक संतोष के लिए कंपनी प्रतिबद्ध है।
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