भारत वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए 1.5 लाख प्रशिक्षित केयरगिवर तैयार करेगा। कौशल विकास मंत्रालय इस योजना का नेतृत्व कर रहा है, जिससे युवाओं के लिए …और पढ़ें
भारत 1.5 लाख प्रशिक्षित केयरगिवर तैयार करने की योजना।
कौशल विकास मंत्रालय इस पहल का नेतृत्व कर रहा।
2035 तक 30 करोड़ केयरगिवर की वैश्विक मांग।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विश्व में खुलती जा रही रोजगार की नई राहों पर भारत की नजर है। जिस तरह से दुनिया के तमाम देशों में बूढ़ी होती आबादी की चुनौती बढ़ती जा रही है, वैसे ही वहां केयरगिवर्स यानी स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के लिए नौकरी के अवसर मजबूत होते जा रहे हैं। इन अवसरों को भुनाने के लिए ही केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषणा की थी कि देशभर में डेढ़ लाख प्रशिक्षित केयरगिवर तैयार किए जाएंगे।
अब इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ ही अन्य संबंधित मंत्रालय आगे आए हैं। केयरगिवर ट्रेनिंग ईकोसिस्टम बनाने के लिए पूरी रूपरेखा बना ली गई है। कौशल विकास मंत्रालय ने केयरगिवर्स के प्रशिक्षण की योजना को शुरू करने की औपचारिक घोषणा कर दी है।
इसके तहत कुल लक्ष्य डेढ़ लाख में से 1 लाख 30 हजार उम्मीदवारों को कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के तंत्र के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा, जबकि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने अपने संसाधनों से 20 हजार उम्मीदवारों को प्रशिक्षण देने की इच्छा जताई है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के अंतर्गत विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।
राज्यों के कौशल विकास मिशनों के साथ अस्पताल, मेडिकल कालेज, नर्सिंग संस्थान और अन्य स्वास्थ्य संस्थान भी जुड़ रहे हैं। प्रशिक्षण प्रदाताओं के चयन के लिए स्किल इंडिया डिजिटल हब पोर्टल के माध्यम से प्रस्ताव मांगे गए थे। यह व्यवस्था तय की गई है कि उम्मीदवारों को अकादमिक प्रशिक्षण के साथ अस्पताल आदि में व्यावहारिक अनुभव भी दिया जाए।
मल्टी-स्किल्ड केयरगिवर को बुजुर्गों, रोगियों और सहायता की आवश्यकता वाले लोगों की रोजमर्रा की देखभाल से संबंधित कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में व्यक्तिगत स्वच्छता, पोषण, बुनियादी स्वास्थ्य सहायता, गतिशीलता में सहयोग, संवाद कौशल और आपात परिस्थितियों में प्राथमिक उपचार जैसे विषय शामिल किए जाने की संभावना है।
इसके माध्यम से प्रशिक्षित उम्मीदवार अस्पतालों, वृद्धाश्रमों, पुनर्वास केंद्रों, घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थागत देखभाल केंद्रों में कार्य कर सकेंगे। मंत्रालय के अनुसार, योजना के क्रियान्वयन के लिए कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी वर्कफोर्स गठित किया गया है।
इसमें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, एनसीवीईटी, एनएसडीसी और संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह वर्कफोर्स केयरगिवर की विभिन्न श्रेणियों, प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, जाब रोल, प्रमाणन प्रक्रिया, प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता और रोजगार से जुड़ी जरूरतों पर समन्वित रूप से काम करेगा, ताकि देशभर में प्रशिक्षण के मानक एक समान हों।
2035 तक 30 करोड़ रोजगार की संभावना यह योजना बनाने की पीछे सरकार की मंशा यही है कि केयरगिवर्स के लिए दुनिया में बन रहे रोजगार के अवसरों को भुनाया जाए। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार, 2035 तक लगभग 30 करोड़ केयरगिवर्स की जरूरत होगी। सबसे अधिक संभावनाएं कनाडा, यूके, आस्ट्रेलिया, जर्मनी, आयरलैंड और यूएई जैसे देशों में होगी।
जयन्त चौधरी कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री ने कहा कि तेजी से बदलते सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिवेश में प्रशिक्षित केयरगिवर की मांग लगातार बढ़ रही है। यह पहल केवल स्वास्थ्य एवं देखभाल सेवाओं की जरूरत पूरी नहीं करेगी, बल्कि युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार और आजीविका के नए रास्ते भी खोलेगी।