जब किसी ईमानदार सराफा कारोबारी के घर बिना पूरी जांच के अचानक पुलिस पहुंचती है, तो उस व्यापारी की पत्नी, बच्चों और पूरे परिवार पर क्या गुजरती है, इसे सिर्फ वही भुगतभोगी समझ सकते हैं। किसी चोर या अपराधी की गलती का खामियाजा जब एक कानून मानने वाले दुकानदार को भुगतना पड़ता है, तो उसका हंसता-खेलता परिवार समाज में बदनामी और मानसिक प्रताड़ना के गहरे दलदल में धंस जाता है।
सराफा कारोबारियों और उनके परिवारों के इसी गंभीर दर्द सहित ज्वैलरी उद्योग की चार बड़ी दिक्कतों को लेकर ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोरा के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से गुरुवार शाम 8 बजे मुलाकात की और ऐतिहासिक सुधारों का एक बड़ा नीति-प्रस्ताव सौंपा।
निर्दोष व्यापारियों को पुलिसिया खौफ से बचाने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री के सामने सबसे बड़ी मांग यह रखी कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317 के तहत पूरे देश में जांच का एक समान नियम (SOP) लागू होना चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि कोई शातिर अपराधी चोरी का सोना किसी दुकान पर बेच जाता है और पुलिस बिना गहराई से जांच किए सीधे दुकानदार का उत्पीड़न शुरू कर देती है, जिससे उसका पूरा परिवार परेशान हो जाता है। फेडरेशन ने सुझाव दिया कि अगर ज्वेलर के पास जीएसटी बिल, सीसीटीवी फुटेज और ग्राहक का केवाईसी रिकॉर्ड मौजूद है, तो उसे प्राथमिक सबूत मानकर कारोबारी को सुरक्षा दी जानी चाहिए।
पूरे देश में सोने-चांदी का एक ही रेट करने का प्रस्ताव
आज देश के अलग-अलग शहरों और बुलियन एसोसिएशनों द्वारा सोने-चांदी के अलग-अलग भाव घोषित किए जाते हैं। इससे शादी-ब्याह के लिए सोना खरीदने वाली महिलाओं और आम उपभोक्ताओं में हमेशा भ्रम और घबराहट की स्थिति बनी रहती है। इसी उलझन को दूर करने के लिए फेडरेशन ने ‘नेशनल गोल्ड प्राइस अथॉरिटी’ (NGPA) बनाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव दिया। यह सरकारी अथॉरिटी रोजाना वैज्ञानिक आधार पर एक नेशनल बेंचमार्क रेट तय करेगी, जिससे पूरे देश में पारदर्शिता आएगी और ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा।
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