Ranchi News: रांची, विशेष संवाददाता। योगदा सत्संग कॉलेज में शुक्रवार को ज्ञानोदय व्याख्यान शृंखला के तहत ‘जीवन के अनुभवों के प्रति सही दृष्टिकोण’, विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता स्वामी शुद्धानंद गिरि थे। उन्होंने उपनिषद् के मंत्र- असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय, का उल्लेख करते हुए कहा कि असत्य से सत्य और अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना ही मानव जीवन का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि बुद्धि और प्रेम के संतुलन से ही व्यक्ति जीवन के अनुभवों को सही दृष्टिकोण से समझ सकता है और समाज व प्रकृति के प्रति सामंजस्य का भाव विकसित कर सकता है। उन्होंने वर्तमान में जीने, प्रत्येक कार्य को एकाग्रता से करने और स्वयं के निरंतर आत्मपरिष्कार पर बल दिया।
स्वामीजी ने योगदा सत्संग सोसाइटी की गुरु-परंपरा और परमहंस योगानंद के जीवन-दर्शन पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने परमहंस योगानंद के प्रतिपादित चार सूत्रीय पाठ्यक्रम- मेंटल इंजीनियरिंग, सोशल आर्ट्स, स्पिरिचुअल साइंस और साइंस ऑफ बॉडी, की जानकारी देते हुए कहा कि इन सिद्धांतों का उद्देश्य व्यक्तित्व का समग्र विकास है। उन्होंने श्रीश्री दया माता की पुस्तक- फाइंडिंग द जॉय विदिन यू, का उल्लेख करते हुए प्रेम, सेवा, साहस और विश्वास को जीवन के चार प्रमुख आधार बताया।
कार्यक्रम में कॉलेज प्राचार्य डॉ जयेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष जनरल ज्ञान भूषण, सचिव एके सक्सेना, अपर सचिव कर्नल हिमांशु शेखर, डॉ वेद पारीक सहित सभी शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
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