रोहतक में किसान के बेटे ने पास की नीट परीक्षा: 671 अंकों के साथ ऑल इंडिया में हासिल की 476वीं रैंक, जिले मे… – Dainik Bhaskar

रोहतक के गांव बोहर के रहने वाले किसान प्रवीण के बेटे रितेश ने नीट यूजी परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए जिले में टॉप किया। रितेश ने 720 में से 671 अंक हासिल करते हुए ऑल इंडिया में 476वीं रैंक हासिल की। वहीं, डॉक्टर मनोज व भारत तिब्बत सीमा पुलिस में तैनात शमशेर के बच्चों ने भी नीट में शानदार प्रदर्शन किया।
नीट परीक्षा का आयोजन 21 जून को किया गया, जिसमें लाखों स्टूडेंट ने भाग लिया। हालांकि मई में हुई परीक्षा रद्द होने के बाद स्टूडेंट कुछ निराश भी नजर आए, लेकिन जून में दोबारा हुई परीक्षा में जी-जान लगा दी। इसी के दौरान स्टूडेंट का नीट रिजल्ट काफी अच्छा आया और उनके घर में खुशी मनाई जा रही है।
नीट पास करने का रास्ता रहा टेढ़ा-मेढ़ा नीट परीक्षा में 671 अंक हासिल करने वाल गांव बोहर के रहने वाले रितेश ने बताया कि परीक्षा पास करने का रास्ता काफी टेढ़ा-मेढ़ा रहा। कभी-कभी तो काफी खुश हुआ, जब टेस्ट में अच्छे अंक आए। लेकिन फिर बाद में जब अंक अच्छे नहीं आते तो निराशा भी होती है। अपने आप को काफी संभालना पड़ता है।
रितेश ने बताया कि मई की परीक्षा के लिए काफी मेहनत की थी। 700 से अधिक अंक आते, लेकिन पेपर रद्द होने के बाद थोड़ी निराशा हुई। शायद इसी का असर रहा कि अंक कुछ कम आए। इन अंकों से खुश तो नहीं हूं, लेकिन ठीक है। अगर पहले वाला पेपर रद्द नहीं होता तो उसकी रैंक 100 के करीब आती। क्योंकि 80 प्रतिशत आपकी मेहनत होती है और 20 प्रतिशत लक काम करता है।
डॉक्टर के बेटे ने हासिल किए 641 अंक नीट परीक्षा में 641 अंक हासिल करने वाले हर्ष गोयल ने बताया कि उसके पिता डॉ. मनोज व मां डॉ. कोमल है और बड़ी बहन यशिका गोयल भी MBBS की पढ़ाई पीजीआई से कर रही है। उनकी प्रेरणा से ही नीट परीक्षा की तैयारी करते हुए ऑल इंडिया में 2194 रैंक हासिल किए है।
हर्ष गोयल ने कहा कि मई वाली में परीक्षा में काफी मेहनत की थी, लेकिन पेपर रद्द हुआ तो कुछ निराशा हुई। जून की परीक्षा ना तो ड्राप रहा और ना ही फ्रेशर रहा। लेकिन शिक्षकों का अच्छा साथ मिला। जब भी आत्मविश्वास में कुछ कमी आती तो शिक्षक उसे संभाल लेते। दिमाग को फ्रेश करने के लिए बैडमिंटन खेलना या अन्य कुछ एक्टिविटी करता था।
पेपर रद्द होने का लगा रहता डर नीट परीक्षा में 643 अंक हासिल करने वाले गांव घिलौड़ निवासी अजय कौशिक ने बताया कि उसके पिता शमशेर भारत तिब्बत सीमा पुलिस में तैनात रहकर देश की सेवा करते है। मई में हुई परीक्षा रद्द होने के बाद एक डर रहता है कि पेपर कहीं दोबारा रद्द ना हो जाए। शिक्षकों के साथ सामन्जस्य बनाकर रखना होता है। साथ ही मेहनत अधिक करनी पड़ी।
अजय कौशिक ने बताया कि एक महीना अधिक मिला तो पहले वाले से अच्छा पेपर किया। रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई भी की। आखिरी महीने में पूरा फोकस पढ़ाई पर रहा। मोबाइल से ज्यादा दूर भी नहीं रहा। पूरी पढ़ाई को कंट्रोल में रखा। दिमाग को फ्रेश रखने के लिए दोस्त के साथ बाहर जाता था।
इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट दे रहे अच्छा परिणाम इंस्टीट्यूट के सीनियर एकेडमिक डायरेक्टर योगेंद्र ने बताया कि आकाश इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट लगातार अच्छा परिणाम दे रहे है। टॉप 10 से लेकर टॉप 100 में भी इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट शामिल है। हर साल इंस्टीट्यूट के बच्चे अपना ही सेट किया बैंचमार्क बीट करने का प्रयास करते हैं और हर बार ऐसा करते भी है। उन्होंने सभी स्टूडेंट्स को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
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