इमरान मसूद के बयान पर भड़के सपा सांसद हरेंद्र मलिक: मुजफ्फरनगर में बोले- INDIA गठबंधन को कमजोर करने वाली बा… – Dainik Bhaskar

मुज़फ्फरनगर में समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र मलिक ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इमरान मसूद के हालिया बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। शनिवार सुबह करीब 11 बजे उन्होंने कहा कि इमरान मसूद का बयान INDIA गठबंधन की भावना के विपरीत है और इससे विपक्षी एकता कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में विपक्ष की प्राथमिकता सांप्रदायिक ताकतों से मुकाबला करना होनी चाहिए, न कि सहयोगी दलों के बीच मतभेद पैदा करना।
हरेंद्र मलिक ने कहा कि इमरान मसूद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन उनका हालिया बयान उनकी पार्टी की घोषित नीतियों के अनुरूप प्रतीत नहीं होता। उन्होंने कहा कि संभव है कांग्रेस के शीर्ष नेता भी इस तरह की टिप्पणी से सहमत न हों। उनके अनुसार सार्वजनिक मंचों से ऐसे बयान देना विपक्षी गठबंधन के हित में नहीं है।
आरोप- भाजपा पर नहीं, हमेशा सपा पर ही साधते हैं निशाना
सपा सांसद ने आरोप लगाया कि इमरान मसूद कभी भारतीय जनता पार्टी या उसके नेताओं पर उतनी आक्रामक टिप्पणी नहीं करते, जितनी समाजवादी पार्टी पर करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को मजबूत करना है तो भाजपा की नीतियों और सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने चाहिए, न कि सहयोगी दलों पर हमला करना चाहिए।
2019 के चुनाव का किया जिक्र
हरेंद्र मलिक ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि उस चुनाव में वह और इमरान मसूद दोनों चुनाव मैदान में थे और दोनों को हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि बाद के चुनाव में वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर सांसद बने, जबकि इमरान मसूद भी विपक्षी गठबंधन के सहयोग से संसद पहुंचे।
खड़गे और राहुल गांधी पर छोड़ा फैसला
सपा सांसद ने कहा कि यदि इमरान मसूद को लगता है कि INDIA गठबंधन का कोई लाभ नहीं है, तो उन्हें इस मुद्दे को सार्वजनिक मंचों पर उठाने के बजाय अपनी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस विषय पर निर्णय लेने में सक्षम हैं।
‘भाजपा की नीतियों पर बोलें, सहयोगियों पर नहीं’
हरेंद्र मलिक ने कहा कि विपक्षी दलों का मुख्य उद्देश्य भाजपा और सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ संघर्ष होना चाहिए। उन्होंने इमरान मसूद से अपील की कि वे सहयोगी दलों पर टिप्पणी करने के बजाय भाजपा की नीतियों, प्रशासनिक व्यवस्था और जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करें। उनके मुताबिक इस तरह के बयान विपक्षी एकता को कमजोर करने का काम करते हैं।
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