धरती की गर्मी से बनेगी बिजली! 14 हजार फीट की ऊंचाई पर भारत ने रचा इतिहास, अब 24 घंटे मिलेंगी इलेक्ट्रिसिटी – India.Com

Published By: Gargi Santosh | Updated: Jul 18, 2026, 5:02 PM
भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. दरअसल, लद्दाख में 14 हजार फीट की ऊंचाई पर देश के पहले दो जियोथर्मल (Geothermal) कुओं का निर्माण कार्य पूरा हो गया है. दोनों कुएं 1,000-1,000 मीटर गहरे हैं और इन्हें भारत के पहले डेमोंस्ट्रेशन-स्केल जियोथर्मल पावर प्रोजेक्ट की दिशा में सबसे अहम कदम माना जा रहा है. इसका उद्घाटन लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने किया.
इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसमें धरती के अंदर मौजूद प्राकृतिक गर्मी (Geothermal Energy) का इस्तेमाल करके बिजली बनाई जाएगी. शुरुआती चरण में यहां 1 मेगावाट क्षमता का जियोथर्मल पावर प्लांट लगाया जाएगा. अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा, तो दूर-दराज और ठंडे इलाकों में भी सालभर 24 घंटे लगातार बिजली मिलेगी. इससे उन क्षेत्रों को राहत मिलेगी, जहां बिजली पहुंचना मुश्किल काम है.
बीच में यह प्रोजेक्ट कई महीनों के लिए बंद हो गया था. क्योंकि लद्दाख प्रशासन, लद्दाख ऑटोनॉमस हिल काउंसिल लेह और ONGC Energy Centre के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते (MoU) की अवधि खत्म होना था. बाद में परियोजना की अहमियत को देखते हुए उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने खुद हस्तक्षेप किया और जून 2026 में MoU को अगले पांच साल के लिए बढ़वाया. इसके बाद काम दोबारा शुरू हुआ और दोनों जियोथर्मल कुओं का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया गया.
प्रोजेक्ट पर काम कर रहे इंजीनियरों के मुताबिक, ड्रिलिंग के दौरान करीब 400 मीटर की गहराई पर 135 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान दर्ज किया गया. विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अधिक गहराई पर इससे भी ज्यादा तापमान मिलेगा. यही गर्मी भविष्य में टरबाइन चलाकर बिजली उत्पादन का आधार बनेगी. इस तापमान और भू-वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर जलाशय (Reservoir) का मूल्यांकन किया जाएगा. फिर जियोथर्मल ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग की योजना तैयार होगी.
अधिकारियों ने बताया कि ड्रिलिंग के दौरान भूगर्भीय गतिविधियां, जटिल चट्टानी संरचनाएं और कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं. इसके बावजूद पहला कुआं 22 मई 2026 को 1,000 मीटर की तय गहराई तक पहुंच गया. इसके बाद दूसरा कुआं 3 जून 2026 को शुरू किया गया और महज एक महीने से थोड़ा अधिक समय में 8 जुलाई 2026 को इसे भी 1,000 मीटर की गहराई तक सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया.
यह प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है. इसके जरिए भारत को स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी बड़ी मदद मिलेगी. जियोथर्मल ऊर्जा लगातार उपलब्ध रहने वाला स्रोत है, इसलिए यह सौर और पवन ऊर्जा की तरह मौसम पर निर्भर नहीं रहती. इसके अलावा, इससे लोगों को रोजगार मिलेगा, सुविधाएं बेहतर होंगी और दूरदराज के इलाकों का सामाजिक व आर्थिक विकास भी तेज होगा.
उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने कहा कि अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है, तो भारत के अन्य जियोथर्मल संभावनाओं वाले क्षेत्रों में भी ऐसे पावर प्लांट लगाए जा सकेंगे. इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटेगी और भारत की ऊर्जा व्यवस्था पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बन सकेगी. (Photos from V.K. Saxena X Account)
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