दिल्ली में कितने साल पहले बनाया गया था जंतर-मंतर, किस काम के लिए हुआ था इसका निर्माण – India.Com

Published By: Ikramuddin | Updated: Jul 20, 2026, 6:44 PM
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में बना हुआ है. अक्सर मन में सवाल आता है विरोध-प्रदर्शन के बीच जिस जंतर-मंतर की चर्चा होती है, उसे कितने साल पहले बनाया गया था. इसका निर्माण तब किस काम के लिए किया गया होगा. आज आपको इस ऐतिहासिक स्थल से जुड़े हर एक सवाल का आसान भाषा में जवाब मिलेगा. दरअसल दिल्ली का जंतर-मंतर सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत का हिस्सा भर नहीं है, बल्कि ये तब की वैज्ञानिक सोच का एक बड़ा उदाहरण है.
बताया जाता है कि इसका निर्माण साल 1724 में जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह (II) ने कराया था. अगर साल 2026 के हिसाब से देखें तो इसे बने करीब 302 साल हो चुके हैं. उस समय ना तो आधुनिक टेलीस्कोप थे और ना ही कंप्यूटर. ऐसे में ग्रहों, तारों और समय की सही जानकारी जुटाने के लिए पत्थर और ईंटों से बने बड़े-बड़े वैज्ञानिक यंत्र तैयार किए गए थे. यही वजह है कि जंतर-मंतर आज भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
जंतर-मंतर का निर्माण खगोलीय घटनाओं का सही अध्ययन करने के लिए किया गया था. यहां मौजूद यंत्रों की मदद से सूरज, चांद और ग्रहों की स्थिति देखी जाती थी. इसके अलावा समय, मौसम और ग्रहण जैसी घटनाओं का भी सटीक अनुमान लगाया जाता था. उस दौर में यह एक आधुनिक वैज्ञानिक ऑब्जर्वेटरी मानी जाती थी.
महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय सिर्फ एक शासक नहीं, बल्कि खगोल विज्ञान के अच्छे जानकार भी थे. उन्हें लगा कि उस समय इस्तेमाल होने वाले खगोलीय उपकरण पूरी तरह सही नतीजे नहीं दे रहे हैं. इसलिए उन्होंने बड़े और ज्यादा सटीक यंत्र बनवाने का फैसला किया, ताकि गणनाएं अधिक सही हो सकें.
'जंतर' शब्द संस्कृत के 'यंत्र' से बना है, जिसका मतलब उपकरण या मशीन होता है. वहीं 'मंतर' शब्द 'मंत्र' या गणना से जुड़ा माना जाता है. यानी जंतर-मंतर का मतलब ऐसे यंत्रों का समूह है, जिनकी मदद से खगोलीय गणनाएं की जाती हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर में कई बड़े खगोलीय यंत्र मौजूद हैं. इनमें सम्राट यंत्र, जयप्रकाश यंत्र, राम यंत्र और मिश्र यंत्र प्रमुख हैं. इनका इस्तेमाल समय मापने, ग्रहों की ऊंचाई जानने और आकाशीय पिंडों की स्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता था.
महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में भी जंतर-मंतर बनवाए थे. हालांकि मथुरा वाला जंतर-मंतर अब मौजूद नहीं है. इनमें जयपुर का जंतर-मंतर सबसे बड़ा और सबसे अच्छी स्थिति में सुरक्षित है.
भले ही आज आधुनिक तकनीक उपलब्ध है, लेकिन जंतर-मंतर आज भी विज्ञान और इतिहास का अनोखा उदाहरण माना जाता है. हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसे देखने आते हैं. छात्र भी यहां आकर पुराने समय की वैज्ञानिक तकनीक और खगोलीय गणनाओं के बारे में जानकारी लेते हैं.
दिल्ली का जंतर-मंतर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है. वहीं जयपुर का जंतर-मंतर साल 2010 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था. यह भारत की वैज्ञानिक विरासत का ऐसा उदाहरण है, जो बताता है कि सदियों पहले भी यहां खगोल विज्ञान का गहरा ज्ञान मौजूद था.
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