Ananya Panday Troll : नेपो ग्रुप की पढ़ी-लिखी एक्ट्रेस… हिंदी का सबसे मुश्किल शब्द कौन-सा है? अनन्या पांडे ने दिया ऐसा जवाब कि हो गई ट्रोल – Dainik Tribune

Ananya Panday Troll : बॉलीवुड एक्ट्रेस अनन्या पांडे एक बार फिर सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही है। हालांकि इस बार वजह उनकी कोई फिल्म या फैशन लुक नहीं, बल्कि हिंदी भाषा को लेकर दिया गया जवाब है। हाल ही में एक कंटेंट क्रिएटर ने उनसे पूछा कि हिंदी का सबसे मुुश्किल शब्द कौन-सा है? इसपर अन्यया ने ऐसा जवाब दिया कि वो ट्रोल हो गई।
दरअसल, अनन्या एक फैशन शो पर रैंप वॉक करती दिखी थीं। इवेंट के बाद एक कंटेंट क्रिएटर ने उनसे पूछा कि हिंदी का ऐसा कौन-सा शब्द है, जिसे बोलना सबसे मुश्किल लगता है? इस सवाल पर कुछ पल सोचने के बाद अनन्या ने जवाब दिया, “रसोई घर।” उनका यह जवाब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया।

कई यूजर्स ने अनन्या के जवाब पर हैरानी जताई, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने लिखा कि अगर “रसोई घर” सबसे मुश्किल शब्द है, तो फिर कठिन हिंदी शब्दों का क्या होगा? वहीं, कई यूजर्स ने उनकी हिंदी भाषा की समझ पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने उनपर तंज कसते हुए लिखा, “वो नेपो ग्रुप की सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी एक्ट्रेस हैं।”

 
 
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कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने अनन्या की पीआर टीम पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि पब्लिक मंच पर ऐसे सवालों का जवाब देने के लिए बेहतर तैयारी होनी चाहिए। वहीं, कई लोगों ने पुराने इंटरव्यू का जिक्र करते हुए उन पर तंज कसा।
ऐसा पहली बार नहीं है जब अनन्या पांडे ट्रोलिंग का शिकार हुई हों। इससे पहले उनकी फिल्म ‘चांद मेरा दिल’ में भरतनाट्यम और हिप-हॉप के फ्यूजन डांस को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी। हालांकि बाद में कई प्रोफेशनल भरतनाट्यम डांसर्स उनके समर्थन में सामने आए और उनके डांस की सराहना की।

दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।

‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।

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