'10 साल, 152 पेपर लीक और 0 कनविक्शन…' राहुल गांधी के इस बयान में कितनी सच्चाई? – Aaj Tak News

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देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों और बदहाल परीक्षा प्रणाली को लेकर राजनीति और आक्रोश दोनों चरम पर हैं. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था को ‘गंभीर संकट’ में बताते हुए दावा किया कि बीते 10 वर्षों में लगभग 152 बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन दोषियों को सजा देने के मामले में सरकार का रिपोर्ट कार्ड ‘शून्य’ रहा है.  आइए जानते हैं कि उनके इस बयान के पीछे कितनी सच्चाई है. 
पिछले 10 सालों के 10 बड़े पेपर लीक: जिन्होंने तोड़ी करोड़ों युवाओं की कमर
राहुल गांधी के 152 पेपर लीक के दावों के बीच, अगर हम देश के सबसे बड़े और बहुचर्चित मामलों का विश्लेषण करें, तो राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं से लेकर राज्यों की नौकरियों तक का ढांचा पूरी तरह चरमराया हुआ दिखता है. ये हैं पिछले एक दशक के वे 10 बड़े पेपर लीक, जिन्होंने भारत के शिक्षा और रोजगार तंत्र को सबसे गहरा जख्म दिया. 
1. NEET-UG (2024)
क्या हुआ: देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG का पेपर पटना और गोधरा समेत कई केंद्रों से लीक हुआ. ‘सॉल्वर गैंग’ को परीक्षा से एक रात पहले उत्तर रटवाए गए.
प्रभाव: लगभग 24 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और पूरे देश में भारी आक्रोश फैल गया.
2. UGC-NET (जून 2024)
क्या हुआ: जून 2024 में 9 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने प्रोफेसर बनने और पीएचडी के लिए परीक्षा दी. लेकिन परीक्षा खत्म होने के 24 घंटे के भीतर गृह मंत्रालय की साइबर टीम (I4C) ने इनपुट दिया कि पेपर ‘डार्कनेट’ पर बिक चुका है.
प्रभाव: शिक्षा मंत्रालय को इतिहास में पहली बार पूरी परीक्षा आयोजित होने के अगले ही दिन रद्द करनी पड़ी.
3. यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती (2024)
क्या हुआ: फरवरी 2024 में उत्तर प्रदेश में 60,000 से अधिक पुलिस कांस्टेबल पदों के लिए परीक्षा हुई. परीक्षा से कई घंटे पहले ही व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स पर पूरे उत्तर तैरने लगे थे.
प्रभाव: भारी छात्र आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द की. इस एक परीक्षा में 48 लाख से ज्यादा युवाओं ने आवेदन किया था.
4. यूपी आरओ/एआरओ (RO/ARO) परीक्षा (2024)
क्या हुआ: समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा का पर्चा परीक्षा केंद्रों से लीक होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
प्रभाव: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) को युवाओं के प्रचंड विरोध के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा.
5. राजस्थान REET और सीनियर टीचर भर्ती (2021-2022)
क्या हुआ: राजस्थान में शिक्षक भर्ती (REET Level 2) का पेपर परीक्षा से पहले ही जयपुर के एक स्ट्रॉन्ग रूम से चोरी हो गया. 2022 में चलती बस में अभ्यर्थियों को लीक पेपर हल कराते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया.
प्रभाव: REET 2021 परीक्षा को रद्द करना पड़ा, जिससे 15 लाख से अधिक अभ्यर्थी सीधे प्रभावित हुए.
6. SSC CGL (2017)
क्या हुआ: कर्मचारी चयन आयोग (SSC CGL) की ऑनलाइन परीक्षा में परीक्षा केंद्रों के कंप्यूटर्स को रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर से जोड़कर बाहर बैठे ‘सॉल्वर्स’ से पेपर हल करवाए गए.
प्रभाव: देश भर में महीनों तक ‘SSC छात्र आंदोलन’ चला, जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई.
7. उत्तराखंड UKSSSC स्नातक स्तरीय भर्ती (2022)
क्या हुआ: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली हुई. जांच में खुद आयोग के अधिकारी, कर्मचारी और कई सफेदपोश नेता गिरफ्तार हुए.
प्रभाव: पूरे राज्य में प्रशासनिक उथल-पुथल मच गई और परीक्षा रद्द करनी पड़ी.
8. एमपी पटवारी भर्ती परीक्षा (2023) 
क्या हुआ: मध्य प्रदेश में पटवारी भर्ती परीक्षा के नतीजे आने पर पता चला कि एक ही परीक्षा केंद्र (एनआरआई कॉलेज, भिंड) से टॉप-10 में से 7 टॉपर्स निकले हैं.
प्रभाव: राज्य भर में फर्जीवाड़े के आरोप लगे, जिसके बाद सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया रोककर जांच आयोग बैठाना पड़ा.
9. गुजरात हेड क्लर्क और पंचायत जूनियर क्लर्क परीक्षा (2021-2023)
क्या हुआ: गुजरात में जूनियर क्लर्क भर्ती परीक्षा का पर्चा परीक्षा के दिन सुबह ही लीक हो गया और गिरोह के सदस्यों से प्रिंटेड पेपर बरामद हुए.
प्रभाव: करीब 9.5 लाख परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया और परीक्षा रद्द करनी पड़ी.
10. बिहार BPSC 67वीं पीटी (2022) 
क्या हुआ: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 67वीं प्रारंभिक परीक्षा का पेपर परीक्षा शुरू होने के 15 मिनट पहले ही टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर वायरल हो गया.
प्रभाव: पहली बार बीपीएससी जैसी राज्य की सर्वोच्च प्रशासनिक परीक्षा को लीक के कारण रद्द करना पड़ा, जिससे 6 लाख से अधिक अभ्यर्थी परेशान हुए.
‘कनविक्शन दर’ न के बराबर क्यों?
राहुल गांधी का यह कहना कि ‘एक भी दोषसिद्धि (Conviction) नहीं हुई’ परीक्षा प्रणाली और हमारी कानूनी व्यवस्था की एक बड़ी कड़वी सच्चाई को दर्शाता है. पेपर लीक मामलों में अक्सर स्थानीय स्तर के छोटे कर्मचारियों या ‘सॉल्वर गैंग’ के मोहरों को तो पकड़ लिया जाता है, लेकिन इसके पीछे काम करने वाले मुख्य सरगना, कोचिंग माफिया और शिक्षा अधिकारियों तक जांच की आंच नहीं पहुंच पाती.
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 (Public Examinations Act) से पहले तक देश में पेपर लीक रोकने के लिए कोई एक मजबूत केंद्रीय कानून नहीं था. पुराने कानूनों के तहत आरोपियों को आसानी से जमानत मिल जाती थी और मामले सालों-साल कोर्ट में लटके रहते थे.  
जीरो कनविक्शन का सच
पिछले 10 सालों में कई राज्यों में एसआईटी (SIT) और सीबीआई (CBI) जांचें तो बैठाई गईं, लेकिन किसी भी बड़े ‘पेपर लीक माफिया’ को अदालत से अंतिम रूप से कड़ी सजा जैसे उम्रकैद जैसी मिसाल बनने वाली कनविक्शन नहीं मिल सकी.  
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