पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले का चालीबाड़िरडीही गांव महामारी के बाद 'भूतों का गांव' बन गया है, जहां अब केवल एक परिवार रहता है। …और पढ़ें
एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।
पश्चिम बंगाल का चालीबाड़िरडीही गांव अब ‘भूतों का गांव’ कहलाता है।
वर्षों पहले महामारी के कारण गांव लगभग पूरी तरह खाली हो गया।
वर्तमान में केवल लक्ष्मण बाउरी का परिवार ही यहां रहता है।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बांकुड़ा जिले का चालीबाड़िरडीही गांव आज भी स्थानीय लोगों के बीच ‘भूतों का गांव’ के नाम से जाना जाता है। वर्षों पहले एक भीषण महामारी के बाद गांव लगभग पूरी तरह खाली हो गया था।
समय के साथ यहां भूत-प्रेत से जुड़ी कहानियां फैलती गईं और लोग गांव छोड़ते चले गए। आज स्थिति यह है कि पूरे गांव में केवल लक्ष्मण बाउरी का परिवार ही रहता है।
लक्ष्मण बाउरी ने वर्ष 1982 में वीरान पड़े गांव में लौटकर अपना घर बसाया। धीरे-धीरे करीब 15 परिवार भी वापस आ गए। लेकिन लगभग दस वर्ष पहले एक महिला पर अपने ही बच्चे की हत्या का आरोप लगने के बाद गांव को लेकर फिर डर का माहौल बन गया। इसके बाद सभी परिवार गांव छोड़कर चले गए और केवल लक्ष्मण बाउरी अपने परिवार के साथ वहीं रह गए।
लक्ष्मण बाउरी का कहना है कि शाम ढलने के बाद गांव में चारों ओर सन्नाटा छा जाता है और तरह-तरह की आवाजें सुनाई देती हैं। हालांकि उन्होंने किसी भूत को देखने का दावा नहीं किया। उनका कहना है कि पुश्तैनी जमीन छोड़ने का मन नहीं करता, इसलिए वहीं रह रहे हैं।
वहीं, विज्ञान मंच के जिला सचिव जयदेव चंद का कहना है कि गांव में भूत-प्रेत जैसी कोई बात नहीं है। उनके अनुसार, यह लंबे समय से चला आ रहा अंधविश्वास है और लोगों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की जरूरत है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों में इस गांव को लेकर डर आज भी बना हुआ है।