स्यूता माइग्रेशन संकट: मानवीय त्रासदी या अमेरिका-इजराइल के इशारे पर मोरक्को की सोची-समझी भू-राजनीतिक चाल? – us israel behind ceuta crisis the geopolitics of illegal migration from morocco to spain news in hindi – Jagran

स्यूता से सामने आ रही तस्वीरें सिर्फ कुछ भूखे-प्यास और निराश प्रवासियों की दास्तान नहीं हैं, बल्कि यह दिखाती हैं कि कैसे आज की दुनिया में मानवीय संकट …और पढ़ें
स्यूटा संकट (सोशल मीडिया)
स्यूता में हजारों प्रवासियों ने यूरोप में घुसने का प्रयास किया।
यह संकट मोरक्को-स्पेन कूटनीति का परिणाम माना जा रहा है।
पश्चिमी सहारा विवाद और अमेरिका-इजराइल एंगल भी इसमें शामिल।
डिजिटल डेस्क, मैड्रिड। बीते कुछ दिनों से स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव स्यूता में समंदर पार कर यूरोप में घुसने की कोशिश करते हजारों प्रवासियों की खौफनाक तस्वीरों ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। जान जोखिम में डालकर, रबर ट्यूब और जुगाड़ के सहारे समंदर पार कर यूरोप की सीमा में घुसने की हजारों लोगों की कोशिशें इस साल के सबसे बड़े प्रवासियों के संकट के रूप में सामने आई हैं।
हालांकि आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस भयानक मानवीय संकट की सतह के नीचे गरीबी या अवैध पलायन से कहीं बड़ा सच छिपा है। इन डरावनी और वायरल तस्वीरों के पीछे सिर्फ गरीबी या अवैध पलायन की कहानी नहीं है। पूरा सच यह है कि इसके तार मोरक्को और यूरोप की कूटनीति, पश्चिमी सहारा विवाद और अमेरिका-इजराइल के भू-राजनीतिक समीकरणों से जुड़े हैं।
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अशांतियों के बीच यह घटना दर्शाती है कि कैसे यूरोप की दक्षिणी सीमा अब महज एक सरहद न रहकर कूटनीतिक सौदेबाजी का बड़ा अखाड़ा बन चुकी है। ऐसे में सवाल अब यह है कि इस पूरे संकट के पीछे की असल कहानी क्या है? आइए हम आपको बताते हैं।
इस बात को ऐसे समझिए कि दो दिनों के भीतर 50000 से 60000 लोगों ने स्यूता में घुसने की कोशिश की। मोरक्को और स्यूता के बीच का समुद्र सबसे संकरे हिस्से में महज 100 मीटर चौड़ा है, जो इसे यूरोप में घुसने का सबसे खतरनाक लेकिन छोटा रास्ता बनाता है। इस दौरान 72 लोगों की जान चली गई, जिससे यह घटना एक बड़े मानवीय संकट में बदल गई।
दूसरी ओर स्पेन के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को तस्करों द्वारा टिक टॉक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर गलत तरीके से फैलाया गया, जिससे यह अफवाह उड़ी कि स्यूता पहुंचने वाले लोगों को स्पेन में रहने की अनुमति मिल जाएगी।
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इस बात को ऐसे समझिए कि इमेजिंडिया इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष और भू-राजनीतिक विश्लेषक रबिंदर सचदेव के अनुसार, यह सिर्फ अचानक उपजा प्रवासियों का सैलाब नहीं है। वजह है कि स्पेन को एक कूटनीतिक संदेश देने के लिए जानबूझकर अपनी बॉर्डर सिक्योरिटी में ढील दी थी, जिसमें अमेरिका और इजराइल की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
गौर करने वाली बात यह है कि इस भू-राजनीति के खेल का सबसे बड़ा और अहम कारण पश्चिमी सहारा का विवाद भी है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि मोरक्को की विदेश नीति के केंद्र में पश्चिमी सहारा का विवादित क्षेत्र है, जिस पर मोरक्को अपना दावा करता है, जबकि अल्जीरिया समर्थित ‘पोलिसारियो फ्रंट’ इसकी स्वतंत्रता की मांग करता है।
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ऐसे में संकट से ठीक पहले स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने दीर्घकालिक गैस आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए अल्जीरिया का दौरा किया था। बड़ा कारण यह भी है कि अल्जीरिया स्पेन को उसकी प्राकृतिक गैस का एक तिहाई हिस्सा देता है।
दूसरी तरफ मोरक्को इस बात से नाराज था कि स्पेनिश पीएम ने अपनी इस यात्रा के दौरान पश्चिमी सहारा पर मोरक्को के दावे का समर्थन नहीं दोहराया। मोरक्को को लगा कि स्पेन अब अल्जीरिया के करीब जा रहा है और उसने इसके जवाब में यह कूटनीतिक कदम उठाया।
यह पहली बार नहीं है जब मोरक्को ने ऐसा किया हो। मई 2021 में भी स्पेन द्वारा पोलिसारियो फ्रंट के नेता को कोरोना इलाज के लिए शरण देने पर मोरक्को ने बॉर्डर ढीले कर दिए थे, जिससे 8000 लोग स्यूता में घुस आए थे। तब यह विवाद तभी थमा जब स्पेन ने मोरक्को के पक्ष का समर्थन किया था।
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इसको समझने से पहले आपको इजरायल की नाराजगी भी समझनी होगी। इसको ऐसे समझिए कि स्पेन गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों का मुखर आलोचक रहा है। स्पेन ने 2024 में फलस्तीन को देश के रूप में मान्यता दी थी और इजराइली नेतृत्व की आलोचना की थी।
अब बात अगर अमेरिका की करें तो नाटो सदस्य होने के बावजूद स्पेन ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों का समर्थन करने से इनकार कर दिया था। ऐसे में जानकारों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल, स्पेन से अपने पुराने हिसाब चुकता करना चाहते थे, और पेड्रो सांचेज़ की अल्जीरिया यात्रा ने इस पूरी रणनीति के लिए एक ‘ट्रिगर’ का काम किया।
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गौरतलब है कि पिछले एक दशक से यूरोपीय संघ (EU) ने प्रवासियों को रोकने का जिम्मा खुद उठाने के बजाय मोरक्को, ट्यूनीशिया और तुर्किए जैसे देशों को अरबों रुपये दिए हैं। मोरक्को यूरोप के लिए प्रहरी की भूमिका निभाता है।
वह तटों की निगरानी करता है, नावों को रोकता है और तस्करों के नेटवर्क को तोड़ता है। लेकिन जब-जब मोरक्को और यूरोप विशेषकर स्पेन के रिश्ते बिगड़ते हैं, मोरक्को इस गेट को थोड़ा ढीला छोड़ देता है, जिससे सीधे यूरोप की नींद उड़ जाती है।

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