46 साल बाद पनडुब्बी से दागी मिसाइल… भारत का पड़ोसी दुश्मन देश कर रहा कौन सी बड़ी साजिश? – India.Com

Edited by: Vineet Sharan | Updated: Aug 3, 2026, 6:31 PM
Submarine-Based Missile Test: चीन की सेना ने एक नई ताकत हासिल की है. पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने पिछले महीने प्रशांत महासागर में एक मिसाइल का परीक्षण किया. खास बात यह है कि 1982 के बाद से चीन का पहला पुष्ट सबमरीन-बेस्ड मिसाइल टेस्ट था यानी यह मिसाइल एक पनडुब्बी से दागी गई थी.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 जुलाई को हुआ यह लॉन्च हुआ था. परमाणु-संचालित पनडुब्बी से ये फायरिंग की गई थी. मिसाइल ने टेस्ट के दौरान करीब  8,000 किमी की दूरी तय की.
'ग्लोबल टाइम्स' – जो पार्टी के मुखपत्र 'पीपल्स डेली' के स्वामित्व वाला एक अखबार है – की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह JL-3 थी, जिसे परमाणु-संचालित पनडुब्बियों से दागा जा सकता है.
यह एक इंटरकॉन्टिनेंटल-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है. JL-3 को इस सीरीज की मिसाइलों की रेंज 10,000 किमी तक बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया था – जो चीनी तट के पास से दागी गई मिसाइलों के लिए मुख्य भूमि अमेरिका को निशाना बनाने के लिए काफी है. JL-3 को पहली बार पिछले सितंबर में बीजिंग में एक विशाल सैन्य परेड में सार्वजनिक रूप से दिखाया गया था.
माना जाता है कि JL-3 ने 2022 में सर्विस में एंट्री की है. चीन का न्यूक्लियर प्रोग्राम बहुत गुप्त रखा गया है और मिसाइल की डिटेल जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन जानकारों का मानना ​​है कि JL-3 अपने पिछले वर्शन JL-2 की तरह ही तीन-स्टेज वाली, सॉलिड-फ्यूल मिसाइल है. यह कई अलग-अलग टारगेट पर हमला करने वाले री-एंट्री व्हीकल ले जाने में सक्षम है. ये व्हीकल कम से कम तीन न्यूक्लियर वॉरहेड ले जा सकते है. हर एक की ब्लास्ट क्षमता लगभग 250 से 1,000 किलोटन होती है, जिससे एक ही मिसाइल कई टारगेट पर हमला कर सकती है.
चीन ने पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को विकसित करने के लिए 'जुलैंग' – या 'ग्रेट वेव' नाम का प्रोग्राम शुरू किया. इसकी शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी. 1986 तक, पहली JL-1 मिसाइलें देश की पहली परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों, 'टाइप 092' पर तैनात किए जाने के लिए तैयार थीं. लेकिन 1,770 किमी की सीमित ऑपरेशनल रेंज ने उनकी रणनीतिक पहुंच को सीमित कर दिया, जिससे दूसरी पीढ़ी की JL-2 का विकास हुआ, जिसने ऑपरेशनल रेंज को काफी बढ़ाकर 7,200 किमी कर दिया. लेकिन सुरक्षित चीनी जलक्षेत्र से दागे जाने पर भी यह मुख्य भूमि अमेरिका के बड़े हिस्से को रेंज से बाहर रखती थी. (photo credit, AI, for representation only)
Subscribe to Our Newsletter Today!
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
© 1998-2026 INDIADOTCOM DIGITAL PRIVATE LIMITED, ALL RIGHTS RESERVED

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News