TMC के बागी गुट में भी पड़ गई फूट! NDA के 'मंगल मिलन' से दूसरी बार दूर रहे तीन सांसद; कौन-कौन? – Hindustan

पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट में भी फूट पड़ गई है। दरअसल, मंगलवार को संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में NDA संसदीय दल की साप्ताहिक बैठक ‘मंगल मिलन’ आयोजित की गई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और NDA सहयोगियों के नेताओं ने हिस्सा लिया लेकिन इस बैठक से TMC से अलग हुए 20 सांसदों के बागी गुट में से तीन सांसदों ने दूरी बना ली। ये सांसद पहले ही NCPI में शामिल हो चुके हैं लेकिन अब उसमें भी टूट की खबरें आ रही हैं। NCPI में पड़ती दरार ने गठबंधन के भीतर कुछ अलग ही संकेत दिए हैं।
पश्चिम बंगाल की जंगीपुर, मुर्शिदाबाद और बहरामपुर लोकसभा सीटों का प्रतिनिधित्व करने वाले खलीलुर रहमान, अबू ताहिर खान और यूसुफ पठान, 28 जून को हुई NCPI सांसदों की पहली NDA संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे। संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए खान ने कहा, “हम NDA के साथ नहीं हैं और न ही हम BJP में जा रहे हैं, आप निश्चिंत रहें। आज भी NDA की बैठक थी और हम तीनों उसमें नहीं गए। लेकिन हम मुख्यमंत्री (शुभेंदु अधिकारी) द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल होंगे क्योंकि यह मेरी सीट पर विकास कार्यों से जुड़ी है। हम किसी ऐसे कदम का भी समर्थन नहीं करेंगे जो मुसलमानों के खिलाफ हो।” बता दें कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी दिन में संसद भवन पहुंचे थे।
सूत्रों ने बताया कि मुस्लिम-बहुल निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन तीन सांसदों ने “NDA बैठक में शामिल न होने का फैसला तब किया जब उनके कुछ मतदाताओं ने BJP के साथ उनके कथित जुड़ाव पर सवाल उठाए”। इन तीन सांसदों की अनुपस्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लोकसभा में 20 सदस्यीय NCPI समूह को मान्यता देने का मामला अभी भी स्पीकर ओम बिरला के पास लंबित है। यह अलग हुआ समूह दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा तभी मांग सकता है जब इसमें TMC के मूल 28 लोकसभा सांसदों की संख्या का कम से कम दो-तिहाई हिस्सा शामिल हो।
NCPI के फ्लोर लीडर सुदीप बंद्योपाध्याय भी मंगलवार को पहली बार NDA संसदीय दल की बैठक में शामिल हुए। वह 28 जून की बैठक में शामिल नहीं हो पाए थे। उन्होंने कहा, “मैं देश के सबसे सीनियर सांसदों में से एक हूं। NCPI में सभी एकजुट हैं। यह एक अच्छा अनुभव है।” हालांकि, उन्होंने बागी सांसदों के बीच मतभेद की बातों को खारिज कर दिया।
संसद भवन परिसर में हुई इस बैठक में, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बगल में बैठे दिखे। यह बैठक बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी को झटका लगने के एक दिन बाद हुई, जहां पार्टी का उम्मीदवार चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर से हार गया था। बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में उपचुनाव इसलिए कराना पड़ा क्योंकि नवीन ने बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा के लिए चुने जाने पर यह सीट छोड़ दी थी। बैठक में NDA के अन्य सहयोगियों JD(U), JD(S), NCP, शिवसेना और अन्य दलों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत कई अन्य नेता शामिल हुए।
प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन’ रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन’ है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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