UP Vidhan Sabha: विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना कल के बवाल के बाद आज विधानसभा में भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि मना करने के बाद ही सदन में कल जो हुआ, वह अत्यन्त निंदनीय है। इस बात पर विचार करना पड़ेगा की मैं इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं। मैंने पिछले साढ़े चार साल में जो किया है वो उचित है या अनुचित, मैं आत्ममंथन करने के बाद जल्द ही निर्णय लूंगा।
स्पीकर सतीश महाना ने सदन में कहा, ‘मैंने पिछले साढ़े चार सालों में हमेशा प्रयास किया कि विधानसभा और विधायक की जो गरिमा होनी चाहिए, वह बनी रहे। समाज में विधायिका और विधायकों के बारे में जो धारणा बनाई जा रही थी, उससे मुझे पीड़ा होती थी। लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद, सहमति और असहमति संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। लोगों ने मुझसे पूछा कि विपक्ष सदन में शोर क्यों करता है। मैंने कहा कि यह उनका अधिकार है। विपक्ष सरकार की केवल प्रशंसा करने के लिए नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को सचेत करने के लिए सदन में आता है। वहीं सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने कार्यों को जनता के सामने रखे। कई बार असहज परिस्थितियां भी बनती हैं, लेकिन उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से संभालना हमारी परंपरा रही है।’
सतीश महाना ने अपने भाषण में आगे कहा, ‘ऐसा नहीं है कि कल से पहले इन साढ़े चार वर्षों में विपक्ष वेल में नहीं आया। पहले भी कई बार आया, लेकिन समय और परिस्थितियों को देखते हुए अपनी बात रखकर वापस चला गया। मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि यदि भविष्य में कोई कमी होगी तो वह संविधान में नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले व्यक्तियों में होगी। कल सदन में जो कुछ हुआ, उससे मैं दुखी और निराश हूं। पहली बार मुझे लगा कि कहीं न कहीं हमारे प्रयासों में कमी रह गई या फिर बाबा साहब की यह बात सही साबित हो रही है कि कमी संविधान में नहीं, बल्कि व्यक्तियों में होती है। कल सदन के एक ऐसे सदस्य के व्यवहार ने मुझे सबसे अधिक दुख पहुंचाया, जिन्हें इस सदन में रोल मॉडल माना जाता है।’
सतीश महाना ने कहा कि उनके बार-बार मना करने के बावजूद सदन के बाहर और उनके कक्ष के बाहर जिस भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे वह निराशा हैं उनकी राजनीतिक पारी काफी लंबी रही है और अब अपने अंतिम चरण में है। अध्यक्ष के रूप में मेरी हमेशा यही कोशिश रही कि विधायिका ने मुझे जो सम्मान और जिम्मेदारी दी है, उसका कुछ ऋण चुका सके।
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पवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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