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Home » देश » आसमान में अचानक क्यों हिलने लगता है विमान? एयर इंडिया फ्लाइट में टर्बुलेंस के बाद जानिए पूरा विज्ञान| Air India Flight Turbulence
Air India Flight Turbulence: फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान मंगलवार को अचानक हल्के टर्बुलेंस की चपेट में आ गई। उड़ान के दौरान विमान को कुछ समय के लिए अपनी ऊंचाई कम करनी पड़ी। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई यात्री गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ। लेकिन इस घटना के बाद एक बार फिर लोगों के मन में सवाल उठने लगा कि आखिर उड़ान के दौरान विमान में अचानक झटके क्यों लगते हैं और क्या यह स्थिति खतरनाक होती है?
दरअसल, विमान में महसूस होने वाले इन झटकों को एयर टर्बुलेंस कहा जाता है। यह ऐसी स्थिति होती है जब विमान अस्थिर हवा वाले क्षेत्र से गुजरता है। कई बार यात्रियों को ऐसा महसूस होता है कि विमान अचानक नीचे गिर रहा है या तेजी से ऊपर उठ रहा है, जबकि ज्यादातर मामलों में यह सामान्य वायुमंडलीय बदलाव का हिस्सा होता है।
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आसमान में हवा हर जगह एक जैसी नहीं चलती। कहीं हवा तेज होती है तो कहीं धीमी। कुछ जगहों पर हवा ऊपर की ओर उठती है, जबकि कहीं नीचे की तरफ बहती है। जब विमान इन अलग-अलग दिशा और गति वाली हवाओं के बीच से गुजरता है तो उसमें कंपन और झटके महसूस होते हैं। इसी स्थिति को एयर टर्बुलेंस कहा जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, टर्बुलेंस उड़ान का सामान्य हिस्सा है और आधुनिक विमानों को इसी तरह की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है।
टर्बुलेंस का सबसे आम कारण खराब मौसम होता है। गरज वाले बादलों, तेज बारिश और तूफानी परिस्थितियों में हवा तेजी से ऊपर-नीचे चलती है। यदि विमान ऐसे क्षेत्र से गुजरता है तो यात्रियों को झटके महसूस हो सकते हैं।
जब तेज हवा किसी पर्वत से टकराती है तो उसके पीछे हवा में लहर जैसी स्थिति बन जाती है। यदि विमान इन लहरों से होकर गुजरता है तो उसे झटके लगते हैं। इसे माउंटेन वेव टर्बुलेंस कहा जाता है।
दिन के समय जमीन गर्म होने पर गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे आती है। इस प्रक्रिया से वातावरण में हलचल पैदा होती है। जब विमान इस हिस्से से गुजरता है तो उसे थर्मल टर्बुलेंस का सामना करना पड़ सकता है।
कई बार आसमान पूरी तरह साफ होता है, फिर भी विमान में झटके महसूस होते हैं। ऐसा ऊंचाई पर मौजूद तेज गति वाली हवाओं यानी जेट स्ट्रीम के कारण होता है। इसे क्लियर एयर टर्बुलेंस कहा जाता है। इसकी खास बात यह है कि इसे बादलों या बारिश से पहले पहचानना आसान नहीं होता।
टर्बुलेंस को उसकी तीव्रता के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है।
हल्का टर्बुलेंस में विमान लगभग एक मीटर तक ऊपर-नीचे हो सकता है और कई बार यात्रियों को इसका अहसास भी नहीं होता।
मध्यम टर्बुलेंस के दौरान विमान करीब 3 से 6 मीटर तक ऊपर-नीचे हो सकता है। इस स्थिति में सीट बेल्ट बांधकर रखना बेहद जरूरी होता है।
तेज टर्बुलेंस सबसे गंभीर माना जाता है। इसमें विमान करीब 30 मीटर तक ऊपर-नीचे हो सकता है। यदि यात्री ने सीट बेल्ट नहीं लगाई हो तो चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है।
टर्बुलेंस अक्सर हवा की किसी सीमित परत में होता है। इसलिए पायलट मौसम के रडार, एयर ट्रैफिक कंट्रोल से मिली जानकारी और आसपास उड़ रहे अन्य विमानों की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेते हैं कि विमान को ऊपर ले जाना है या नीचे। कई बार केवल कुछ हजार फीट की ऊंचाई बदलने से विमान टर्बुलेंस वाले क्षेत्र से बाहर निकल जाता है, क्योंकि अलग-अलग ऊंचाई पर हवा की गति और दिशा भी बदल जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश टर्बुलेंस सामान्य होते हैं और विमान की सुरक्षा पर इनका कोई बड़ा असर नहीं पड़ता। आधुनिक विमान ऐसी परिस्थितियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम होते हैं। यात्रियों के लिए सबसे जरूरी सलाह यही है कि उड़ान के दौरान जब भी सीट बेल्ट का संकेत जल रहा हो, उसे बांधे रखें। ऐसा करने से अचानक लगने वाले झटकों के दौरान चोट लगने की आशंका काफी कम हो जाती है।
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नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।
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