Ramayana Mystery: आखिर कौन था मारीच? जिसकी एक चाल ने बदल दी रामायण की पूरी कहानी – India.Com

Ramayana Mystery: हाल ही में बॉलीवुड फिल्म रामायण का रिलीज हुआ और आते ही सोशल मीडिया पर छा गया. रामायण का ट्रेलर आउट होते ही सोशल मीडिया पर हलचल मच गई है. यूं तो फिल्म के हर किरदार को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है, लेकिन जिस एक पात्र ने सबसे ज्यादा सस्पेंस और उत्सुकता बढ़ाई है, वह है मारीच. ट्रेलर देखने के बाद हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि आखिर रामायण की कथा में मारीच की क्या भूमिका थी और वह कौन था?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार मारीच कोई साधारण किरदार नहीं था, बल्कि मारीच एक शक्तिशाली राक्षस था. वह राक्षसी ताड़का का पुत्र और सुंद नामक राक्षस का बेटा था. मारीच और उसका भाई सुबाहु ऋषि-मुनियों के यज्ञों में विघ्न डालने के लिए प्रसिद्ध थे. जब महर्षि विश्वामित्र भगवान राम और लक्ष्मण को अपने यज्ञ की रक्षा के लिए लेकर गए, तब मारीच ने ऋषि-मुनियों पर हमला किया और यज्ञ भंग करने की कोशिश की, तब भगवान राम ने अपने दिव्य बाण से मारीच को दूर समुद्र की ओर फेंक दिया. इस घटना के बाद मारीच भगवान राम की शक्ति से भली-भांति परिचित हो गया और उनके प्रति भय और सम्मान दोनों रखने लगा. रामायण के अनुसार मारीच लंकापति रावण का मामा था और उसे अपनी इच्छानुसार रूप बदलने की अद्भुत कला हासिल थी.

जब रावण ने अपनी बहन शूर्पणखा का अपमान और खर-दूषण के वध का समाचार सुना, तो उसने माता सीता का हरण करने की योजना बनाई. इसके लिए उसे ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जो भगवान राम को आश्रम से दूर ले जा सके. रावण ने मारीच से सहायता मांगी, मारीच भले ही राक्षस कुल का था, लेकिन वह भली-भांति जानता था कि श्री राम साक्षात भगवान हैं और उनसे शत्रुता का परिणाम मृत्यु ही है. फिर भी रावण के भय और नियति के हाथों विवश होकर उसने इस छलावा योजना में रावण का साथ दिया था.

आखिरकार रावण के दबाव में मारीच ने स्वर्ण मृग का रूप धारण किया और पंचवटी में भगवान राम की कुटिया के पास घूमने लगा. उसकी चमक और सुंदरता देखकर माता सीता ने भगवान राम से उस मृग को लाने का आग्रह किया. भगवान राम स्वर्ण मृग के पीछे चले गए और काफी दूर जाने के बाद उन्होंने अपने बाण से मारीच का वध किया.
और पढ़ें: Raksha Bandhan 2026: क्या इस साल रक्षाबंधन पर रहेगा भद्रा का साया? ज्योतिषाचार्य से जानिए राखी बांधने का सही समय

मृत्यु के समय मारीच ने भगवान राम की आवाज में पुकार लगाई- ‘हा लक्ष्मण! हा सीते!’ यह आवाज सुनकर माता सीता चिंतित हो गईं और उन्होंने लक्ष्मण से भगवान राम की सहायता के लिए जाने को कहा. लक्ष्मण के आश्रम छोड़ते ही रावण साधु का वेश धारण करके वहां पहुंचा और माता सीता का हरण कर लिया. यही वह घटना थी जिसने रामायण की पूरी कथा को नया मोड़ दिया और आगे चलकर लंका युद्ध का कारण बनी.
धार्मिक ग्रंथों में मारीच को राक्षस माना गया है, लेकिन उसके चरित्र का एक पक्ष यह भी है कि वह भगवान राम की शक्ति और धर्म को समझ चुका था. उसने रावण को कई बार चेतावनी दी थी कि श्रीराम से वैर करना उचित नहीं है. फिर भी भय और विवशता के कारण वह रावण की योजना का हिस्सा बना.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Faith Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों … और पढ़ें
Subscribe to Our Newsletter Today!
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
© 1998-2026 INDIADOTCOM DIGITAL PRIVATE LIMITED, ALL RIGHTS RESERVED

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News