तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के दुष्कर्म मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10 साल की जेल की सजा सुनाई है। तेजपाल ने इसे राजनीतिक साजिश बताते …और पढ़ें
वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल।
तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 10 साल की जेल।
2013 के दुष्कर्म मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला।
तेजपाल ने इसे राजनीतिक साजिश बताया, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। चर्चित मैगजीन ‘तहलका’के पूर्व संपादक और वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2013 के एक दुष्कर्म मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट के फैसले के बाद तेजपाल ने दावा किया कि उन्हें राजनीति के चलते फंसाया गया है और उनके पासे इतने सबूत हैं कि उन्हें इस मामले में कम से कम 10 बार बरी किया जाना चाहिए था।
सजा सुनाए जाने के बाद पत्राकरों से बातचीत के दौरान 62 वर्षीय तरुण तेजपाल ने कहा कि उनके साथ पिछले 13 वर्षों से बदले की भावना से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरी न्यायपालिका पर भरोसा है कि कोई तो ऐसा जज होगा जो सच देखेगा। हम सारे सबूत जनता के सामने रखेंगे। मेरे पास इतने सबूत हैं कि मुझे 10 बार बरी कर दिया जाना चाहिए। तेजपाल ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
इसके इतर अपनी बात रखते हुए तरुण तेजपाल ने दिल्ली दंगों के मामले में जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम का हवाला दिया। उन्होंने खुद को उनके जैसा बताते हुए कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम पिछले कई सालों से जेल में हैं। मैं भी उनमें से ही एक हूं। तहलका की पुरानी रिपोर्टिंग, जैसे 2001 का ‘ऑपरेशन वेस्ट एंड’ स्टिंग ऑपरेशन की वजह से कई लोगों को राजनीतिक नुकसान हुआ था, इसलिए वे हमारे पीछे पड़े हैं।
बता दें कि अदालत के अंदर सुनवाई के दौरान तेजपाल ने खुद को पीड़ित बताते हुए जज से नरमी बरतने की अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि मैं 62 साल का हूं और मानता हूं कि मैं एक पीड़ित हूं। मेरी एक पत्नी है और इसके अलावा मेरे पास कहने को कुछ नहीं है।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला नवंबर 2013 का है। तहलका मैगजीन द्वारा गोवा में ‘थिंकफेस्ट’ नाम से एक वार्षिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी इवेंट के दौरान होटल के लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने अपनी ही एक जूनियर सहकर्मी के साथ दो बार 7 और 8 नवंबर को यौन उत्पीड़न किया था।
शिकायत सामने आने के बाद नवंबर 2013 के अंत में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। शुरुआत में तेजपाल ने इस घटना के लिए अफसोस जताया था और इसे स्थितियों को गलत तरीके से समझना बताया था, लेकिन बाद में वे इससे मुकर गए और इसे राजनीतिक साजिश बताने लगे।
दूसरी ओर गोवा सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि तरुण तेजपाल ‘ना’ शब्द को समझना नहीं जानते थे, इसलिए उन्हें अधिकतम सजा दी जानी चाहिए। वहीं, इस फैसले के बाद पीड़िता की मां ने राहत की सांस ली है।
पीड़िता की मां ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि यह फैसला मेरे दिल से एक बहुत बड़ा बोझ उतारने जैसा है। यह बहुत लंबे और दर्दनाक साल थे, जिनसे लड़ने के लिए बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी। मैं गोवा सरकार और उनके वकीलों का शुक्रिया अदा करती हूं जिन्होंने हमारा साथ दिया और न्याय के लिए लड़ाई लड़ी।