'अनिवार्य सेवानिवृत्ति कोई दंड नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया CISF इंस्पेक्टर की नौकरी में बहाली की अपील – sc upholds cisf compulsory retirement for poor performance news in hindi – Jagran

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का उद्देश्य व्यवस्था से निष्क्रिय कर्मचारियों को हटाना है, यह दंडात्मक नहीं बल्कि जनहित में ए …और पढ़ें
सुप्रीम कोर्ट
अनिवार्य सेवानिवृत्ति का लक्ष्य निष्क्रिय तत्वों को हटाना।
सीआईएसएफ इंस्पेक्टर की बहाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की।
अंतिम दो वर्षों में इंस्पेक्टर के प्रदर्शन में गिरावट आई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय न्यायपालिका ने सार्वजनिक सेवा में पारदर्शिता और उच्च मानकों को बनाए रखने के एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का मूल उद्देश्य व्यवस्था से निष्क्रिय और अनुपयोगी तत्वों को बाहर का रास्ता दिखाना है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक सीआइएसएफ इंस्पेक्टर की नौकरी में बहाली की याचिका को खारिज करते हुए यह भावपूर्ण टिप्पणी की। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि अपीलकर्ता के सेवा के अंतिम दो वर्षों के प्रदर्शन में भारी गिरावट आई थी।
उसकी ग्रेडिंग अच्छी से गिरकर औसत पर आ गई थी और उसके बाद वह वहीं ठहर गई थी। कोर्ट ने संवेदनशीलता के साथ इस बात पर जोर दिया कि सीआइएसएफ एक अत्यंत अनुशासित बल है, जिस पर देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की भारी जिम्मेदारी होती है। ऐसे बल के हर एक सदस्य से यह अपेक्षा की जाती है कि वे कर्तव्य के प्रति उच्च स्तर की दक्षता, चौकस निगाह और अनुशासन का परिचय दें।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का यह आदेश किसी भी रूप में दंडात्मक नहीं होता है। इसका उद्देश्य किसी कर्मचारी की छवि को धूमिल करना या उस पर किसी प्रकार का कलंक लगाना नहीं होता, बल्कि यह पूरी तरह से जनहित में लिया गया एक प्रशासनिक निर्णय होता है। यह कदम सरकार के आत्म-संतोष और विभाग की कार्यकुशलता को सुचारू बनाए रखने के लिए उठाया जाता है।
गौरतलब है कि अपीलकर्ता ने 28 जून, 1982 को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) में सहायक उप-निरीक्षक के रूप में अपनी सेवा की शुरुआत की थी और अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने दो बार पदोन्नति भी प्राप्त की थी।
हालांकि, उनकी वार्षिक रिपोर्ट (एसीआर) के विश्लेषण से यह बात सामने आई कि सेवा के अंतिम वर्षों में उनकी कार्यक्षमता में सुस्ती आ गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस पुराने आदेश को पूरी तरह से बरकरार रखा, जिसमें 2010 में पारित अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को सही ठहराया गया था। इस निर्णय से यह संदेश मिला है कि सुरक्षा बलों की अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

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