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By शोभना जैन | Updated: August 7, 2026 05:14 IST2026-08-07T05:14:24+5:302026-08-07T05:14:24+5:30
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की हाल ही में नई दिल्ली में वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस से बांग्लादेश सरकार न केवल हसीना से बल्कि भारत से बुरी तरह से तमतमा गई हैं, जब कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले भी भारत सरकार का साफ तौर पर कहना था कि विदेशी संवाददाता के क्लब द्वारा आयोजित हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से उनका कोई संबंध नही हैं. हालांकि, पिछले दो सालों में यह पहली बार है जब उन्होंने वर्चुअल माध्यम से सीधे पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया.बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में सीधे मीडिया से बातचीत की अनुमति दिए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है.
अगस्त 2024 में हसीना ने बांग्लादेश में चल रहे तत्कालीन अशांत और उपद्रवकारी हालात के मद्देनजर अपनी सुरक्षा को लेकर मानवीय आधार पर भारत से शरण मांगी थी. उसके बाद से वे भारत में ही रह रही हैं, लेकिन निश्चित तौर पर दो वर्ष पूर्व भारत द्वारा शरण दिए जाने के बाद से बांग्लादेश और भारत के बीच चल रहे असहज रिश्ते और भी असहज हो गए हैं.
बांग्लादेश ने शेख हसीना को वापस स्वदेश भेजे जाने (प्रत्यर्पण) की मांग को दोहराते हुए कहा कि पिछले डेढ़ वर्ष से बार-बार इस तरह के आग्रह का कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है, जबकि भारत का कहना है कि यह आग्रह उसके विचाराधीन है. बांग्लादेश हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से इस कदर क्षुब्ध हुआ कि उसने राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों को चेतावनी दी थी कि यदि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी रिपोर्ट प्रकाशित की तो उनके खिलाफ न्यायपालिका का इस्तेमाल कर मुकदमे दायर किए जाएंगे.
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है. वे पांच अगस्त 2024 को सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही भारत में हैं. अपने देश में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद पिछले दो साल से भारत में शरणागत शेख हसीना ने कहा कि वे जानती हैं स्वदेश लौटने पर उनकी गिरफ्तारी हो सकती है,
मुकदमा चल सकता है या फर्जी मामलों में फंसा सकते हैं लेकिन यह भय उन्हें अपने दायित्व निभाने से रोक नहीं सकता है. उन्होंने आगामी दिसंबर में अपने समर्थकों के साथ स्वदेश लौटने की इच्छा जताई है. शेख हसीना कह चुकी हैं कि उनके लौटने की इच्छा निजी है और भारत ने उन्हें पूरे सम्मान और आदर से अपने यहां रखा.
अगर वह वाकई दिसंबर में लौट जाती हैं, तो भारत के लिए बांग्लादेश के साथ संबंधों को सामान्य गति से आगे बढ़ाना शायद आसान हो जाए, क्योंकि शेख हसीना को शरण देने की ‘असुविधाजनक स्थिति’ कूटनीति पर असर नहीं डालेगी. हसीना के कार्यकाल में भारत के साथ बांग्लादेश के सहज मैत्रीपूर्ण संबंध रहे थे.
मौजूदा समय में बांग्लादेश से भारत के रिश्ते खासे असहज चल रहे हैं, ऐसे में सरकार के विरोधी रुख के साथ-साथ हसीना की वापसी पर कुल मिलाकर बांग्लादेश के लोग क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं, इसी पर दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्ते तय होंगे.
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