Bhagalpur News: कांवरियों के फीडबैक पर सेवाओं में हो रहा सुधार – Hindustan

Bhagalpur News: भागलपुर, मुख्य संवाददाता। सुल्तानगंज से देवघर के बीच करीब 105 किलोमीटर की दूरी में लाखों कांवरियों की सेवा में सुधार के लिए तीन जिलों का प्रशासन पिछले एक सप्ताह से जुटा हुआ है। सेवा में त्रुटि जानने और बेहतरी के लिए अब तीनों जिला प्रशासन कांवरिया पथ पर कांवर यात्रियों से फीडबैक ले रहा है। प्रशासनिक अधिकारी इन कांवरियों से बात कर फीडबैक को ऊपर पहुंचा रहे हैं। सुल्तानगंज स्थित उत्तर वाहिनी गंगा के घाटों से लेकर कृष्णगढ़ चौक और धांधी बेलारी-कमराय तक का क्षेत्र भागलपुर प्रशासन के अधीन है। भागलपुर की डीएम अलंकृता पांडे भी कांवरियों से बातकर फीडबैक ले रही हैं। वे अस्पताल जाकर भर्ती कांवरियों से बातकर सेवा में सुधार करा रही हैं। जानकार बताते हैं, इस वर्ष इस कठिन ‘कच्चे कांवरिया मार्ग’ पर चलने वाले शिवभक्तों का सफर पहले से कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित महसूस हो रहा है। इसका मुख्य कारण कोई सरकारी आदेश नहीं, बल्कि धरातल पर चल रही एक अनूठी प्रशासनिक कड़ियां हैं। कांवरियों का सीधा फीडबैक और जिलों का आपसी तालमेल, धरातल पर उतरे अधिकारी का हाल खुद पूछ रहे हैं। आमतौर पर सरकारी व्यवस्थाएं फाइलों और बैठकों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन इस बार भागलपुर, मुंगेर और बांका का जिला प्रशासन एक अलग ही रूप में नजर आ रहा है। जिलाधिकारी से लेकर प्रखंड स्तर के अधिकारी खुद चिलचिलाती धूप और उमस के बीच कच्चे कांवरिया मार्ग पर पैदल चल रहे हैं। वे केवल निरीक्षण नहीं कर रहे, बल्कि आराम कर रहे कांवरियों के पास बैठकर, उन्हें पानी-शरबत पूछते हुए सीधे संवाद कर रहे हैं। अधिकारी कांवरियों से दो मुख्य सवाल पूछ रहे हैं। पहला, रास्ते में आपको कहां और क्या बाधा आई? और दूसरा, कौन सी व्यवस्था आपको सबसे बेहतर लगी? इस सीधे संवाद से कांवरियों को भी यह अहसास हो रहा है कि उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई है।

इस बार की कांवर यात्रा प्रबंधन की सबसे बड़ी खासियत अंतरजिला समन्वय है। प्रशासनिक तौर पर भागलपुर, मुंगेर और बांका की सीमाएं भले ही अलग हों, लेकिन कांवरियों की सेवा के लिए तीनों जिलों ने अपनी सीमाओं को भुला दिया है। कांवरिया मार्ग का एक बड़ा हिस्सा मुंगेर और बांका के पहाड़ी और जंगली इलाकों से होकर गुजरता है, जबकि यात्रा की शुरुआत भागलपुर के सुल्तानगंज से होती है। बांका और मुंगेर का प्रशासन जब अपने क्षेत्रों में कांवरियों से फीडबैक लेता है और यदि उसमें सुल्तानगंज या भागलपुर सीमा से जुड़ी कोई कमी सामने आती है, तो वे तुरंत इसकी सूचना भागलपुर प्रशासन को देते हैं। इसी तरह, बिहार की सीमा खत्म होने पर झारखंड का देवघर प्रशासन, बांका प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है। सूचनाओं का यह आदान-प्रदान इतनी तेजी से हो रहा है कि समस्याएं पैदा होते ही उनका समाधान कर दिया जाता है।

कांवरियों के सुझावों पर प्रशासन ‘रियल-टाइम’ काम कर रहा है। उदाहरण के लिए, जब कुछ कांवरियों ने मुंगेर के रास्ते में रात के समय रोशनी कम होने की बात कही, तो मुंगेर प्रशासन ने तुरंत वहां अतिरिक्त वेपर लाइटें लगवा दीं। बांका के रेतीले रास्ते पर जब पैर जलने की शिकायत मिली, तो वहां फौरन पानी के छिड़काव की व्यवस्था बढ़ाई गई और गंगा के बालू पर बिछी घास (पुआल) को दुरुस्त किया गया। शौचालय की सफाई, पेयजल की उपलब्धता और स्वास्थ्य शिविरों में दवाओं का स्टॉक, ये सब कुछ अब कांवरियों के इनपुट के आधार पर ही नियंत्रित और बेहतर किया जा रहा है। यूपी के कुशीनगर से आए कांवरिया कमलेश मौर्य ने बताया कि पहले रास्ते में गड्ढे या पानी की किल्लत होने पर हमें समझ नहीं आता था कि किससे कहें। इस बार साहब लोग खुद आकर पूछ रहे हैं और हमारे सामने ही कर्मचारियों को निर्देश देकर काम करवा रहे हैं।

कांवरियों से मैं खुद सुविधा के बारे में पूछ रही हूं। ताकि सुधार हो सके। बांका-मुंगेर से भी फीडबैक मिलने पर सुधार कराया जा रहा है।

– अलंकृता पांडे, डीएम, भागलपुर।

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