भास्कर संवाददाता | चूरू
जिले के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों के हिंदी पढ़ने के अंदाज और उनकी रफ्तार को एआई परखेगा। इसमें शाला दर्पण शिक्षक एप के जरिए मोबाइल की स्क्रीन पर दिख रहे पैराग्राफ को बच्चा बोलकर पढ़ेगा और एप में एआई यह तुरंत बता देगा कि बच्चे ने कितने शब्द सही पढ़े हैं।
मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 3 से 8 तक के नौनिहालों की हिंदी पठन दक्षता सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। माध्यमिक शिक्षा बीकानेर के निदेशक की तरफ से जारी आदेशों के अनुसार 10 से 12 अगस्त तक प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में मौखिक पठन प्रवाह हिंदी बेसलाइन आकलन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
सीडीईओ डॉ. संतोष महर्षि ने बताया कि इस आकलन का मुख्य उद्देश्य केवल बच्चों को आंकना नहीं, बल्कि उनकी पढ़ने से जुड़ी कठिनाइयों की पहचान करना है। मूल्यांकन के बाद प्राप्त आंकड़ों के आधार पर विद्यार्थियों का स्तर अनुसार वर्गीकरण किया जाएगा। इसमें जो बच्चे अपनी कक्षा के स्तर से पीछे पाए जाएंगे, उन्हें विशेष रेमेडियल शिक्षण (उपचारात्मक शिक्षण) के जरिए लक्षित सहयोग देकर उनका शैक्षणिक स्तर सुधारा जाएगा।
रोज 7वां पीरियड पठन कालांश होगा : स्टूडेंट्स में पढ़ने की आदत और आत्मविश्वास विकसित करने के लिए शिक्षा विभाग ने दैनिक समय-सारणी में भी बड़ा बदलाव लागू किया है। अब कक्षा 1 से 8 तक के सभी सरकारी स्कूलों में प्रतिदिन 7वें कालांश को पठन कालांश के रूप में अनिवार्य किया गया है। इस दौरान स्टूडेंट्स पुस्तकालय की किताबों, अखबारों और कहानियों को पढ़कर सुनाएंगे। इसके अलावा, प्रार्थना सभा में भी बच्चों से पठन गतिविधियां करवाई जाएंगी ताकि वे निडर होकर वाचन कर सकें। सीडीईओ महर्षि ने बताया कि ओआरएफ कोई पारंपरिक लिखित परीक्षा नहीं है। ये एक एआई आधारित पहल है। इसमें शिक्षक शाला दर्पण से बच्चों को पठन सिखाएंगे। स्टूडेंट्स को एप में दिख रही उसकी कक्षा या स्तर के अनुसार पठन सामग्री पढ़कर सुनानी होगी। एआई स्टूडेंट्स की आवाज रिकॉर्ड कर यह मापेगा कि वह एक मिनट में कितने सही शब्द और कितनी सटीकता से पढ़ पा रहा है।
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