अगस्त 1942 में जब महात्मा गांधी के नेतृत्व में देशभर में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की ज्वाला धधक रही थी, तब उसकी तपिश धामपुर तक भी पहुंची। आज से 84 वर्ष पूर्व धामपुर की धरती पर चौधरी कुलमणि सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ ऐसी सिंह गर्जना की थी, जिसकी गूंज लंबे समय तक क्षेत्र के लोगों के दिलों में रही।
उस समय चौधरी कुलमणि सिंह अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा चुके थे और फतेहगढ़ केंद्रीय कारागार में अदालत द्वारा सुनाई गई सजा काटकर बाहर आए थे। 12 अगस्त 1942 की उस सुबह धामपुर की गलियों में रोज की अपेक्षा कुछ अलग हलचल थी। भोर में लोग टहलकर अपने घरों को लौट रहे थे। आसपास के गांवों से लोग घरेलू उपयोग के लिए रोजमर्रा का सामान लेकर शहर में पहुंच रहे थे, वहीं दूसरी ओर शहर के विभिन्न गली-मोहल्लों के नुक्कड़ों पर नौजवानों के झुंड जुटने लगे थे।
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इंकलाब जिंदाबाद, अंग्रेजों भारत छोड़ो।’
इसी बीच चौधरी कुलमणि सिंह तेजी से एक गली से निकलकर बाजार में पहुंचे। उन्होंने हाथ हवा में लहराया और बुलंद आवाज में नारा लगाया-‘इंकलाब जिंदाबाद, अंग्रेजों भारत छोड़ो।’
उनकी आवाज सुनते ही युवाओं में जोश भर गया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में नौजवान एकत्र हो गए और जुलूस की शक्ल में शहर की गलियों से गुजरते हुए थाने की ओर बढ़ चले। नगीना मार्ग स्थित किरोड़ीमल इंग्लिश हाईस्कूल तक भी आंदोलन की लहर पहुंची। उत्साही युवाओं ने विद्यालय में छुट्टी करा दी। इसके बाद स्कूली छात्र भी जुलूस में शामिल होकर थाने पहुंच गए।
आज के एसपी ऑफिस पूर्वी (पुरानी तहसील प्रांगण) में खड़ा पिलखन का पेड़ आजादी का गवाह है
आजादी के मतवाले थाने पर काफी देर तक अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ नारेबाजी करते रहे । बाद में जुलूस तहसील परिसर की ओर बढ़ गया। तहसील प्रांगण में स्थित पिलखन के पेड़ के नीचे पहुंचने पर आंदोलन में एक नया जोश देखने को मिला। सामने स्थित फ्री स्कूल के बच्चे भी पढ़ाई छोड़कर जुलूस में शामिल हो गए।
पिलखन के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर खड़े होकर चौधरी कुलमणि सिंह ने इंकलाबी अंदाज में जनता को संबोधित किया। उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य को खुली चुनौती देते हुए ललकारा-‘अंग्रेजों भारत छोड़ो।’
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जुलूस धामपुर के रेलवे स्टेशन पर जा पहुंचा और स्टेशन मास्टर के कमरे के सामान को आग के हवाले किया गया, टेलीफोन और सिग्नलों में तोड़फोड़ और आग लगा दी गई।
सिग्नल प्रणाली फेल हो जाने के कारण रेल यातायात जगह जगह रुक गया। जिला मुख्यालय से आई भारी फोर्स ने बाद में भारत की आजादी की मांग करने वाले युवाओं को नामजद किया और पूरे शहर में धारा 144 लगा दी। चौधरी कुलमणि सिंह और अन्य लोगों को मुखबिर की सूचना पर 2 दिसंबर1942 को गिरफ्तार कर मेरठ जिला कारागार में भेज दिया गया।
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