भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा
स्वाधीनता दिवस पर चित्रकूटधाम में शुरू हुए ज्ञान गंगा महोत्सव में राष्ट्र संत पुलकसागर महाराज ने देश के नाम, भाषा और संस्कृति को लेकर नेताओं पर भी व्यंग्य किया।
उन्होंने कहा कि नेता जनता के बीच उनकी भाषा में संवाद करते हैं, लेकिन संसद में पहुंचते ही अंग्रेजी को प्राथमिकता क्यों दी जाती है? अंग्रेजी व्यापार और वैश्विक संवाद की भाषा हो सकती है, लेकिन रिश्तों और दिलों की भाषा हिंदी है। उन्होंने भारत बनाम इंडिया के मुद्दे पर कहा कि जब देश का नाम भारत है तो इंडिया कहने की प्रवृत्ति गुलामी की याद दिलाती है। उन्होंने लोगों से इंडिया शब्द का बहिष्कार कर गर्व से भारत बोलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस समाज को अपनी भाषा, नाम, सभ्यता, संस्कृति, परिधान और रीति-रिवाज पर गर्व नहीं होता, उसे गुलाम होने से कोई नहीं रोक सकता।
कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। संभव ग्रुप प्रथम, भारत की बेटियां द्वितीय और आजादी की वीरांगना ग्रुप तृतीय रहा। विजेताओं को नकद पुरस्कार दिए गए। सांसद दामोदर अग्रवाल ने ध्वजारोहण किया।
पुलकसागर ने कहा- प्रेम को जीवन का महामंत्र बनाएं महोत्सव के दूसरे दिन आचार्य पुलकसागर ने कहा कि सुविधाएं होने के बावजूद कई घरों में सुख-शांति नहीं रहती और मन अस्थिर रहता है, इसलिए इस आयोजन का उद्देश्य मन को स्थिर करना और जीवन में प्रेम का प्रवाह बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि घर को स्वर्ग बनाना है और जीवन का आनंद लेना है तो प्रेम को जीवन का महामंत्र बनाना होगा। प्रेम को केवल जपने की नहीं, जीने की जरूरत है और प्रेम ऐसी भाषा है जिसे मनुष्य ही नहीं, पशु भी समझ लेते हैं।
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