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डोसा भारत के सबसे पसंदीदा खाने में से एक है. इसे खाने का सबसे आम तरीका हाथों से ही है. लेकिन नागपुर के एक एटिकेट कोच ने डोसा खाने का ऐसा तरीका दिखाया, जिसे देखकर लोगों ने कहा ऐसे तो भूखें ही रह जाएंगे. उन्होंने बताया कि रेस्टोरेंट में डोसा खाते समय वह चम्मच और कांटे का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं.
यह वीडियो इंस्टाग्राम अकाउंट वेस्टर्न विंग्स स्पोकन इंग्लिश पर शेयर किया गया. इसमें एटिकेट कोच रेस्टोरेंट में डोसा खाने का तरीका बताते नजर आते हैं. सबसे पहले वह चम्मच और कांटा लेकर डोसे को पहले छोटे हिस्से में मोड़ते हैं. इसके बाद कांटे से डोसे का एक छोटा टुकड़ा काटते हैं. उसे चम्मच पर रखकर खाते हैं.
एटिकेट कोच ने बताया डोसा खाने का तरीका
वीडियो के कैप्शन में दावा किया गया कि रेस्टोरेंट में चम्मच और कांटे से डोसा खाना ज्यादा साफ-सुथरा हो सकता है, खासकर तब जब वहां खाने के लिए बर्तन दिए गए हों. पोस्ट में इसे अच्छे और सलीके से खाना यानी ‘ग्रेसफुल डाइनिंग’ का हिस्सा बताया गया. हालांकि, यह तरीका सोशल मीडिया यूजर्स को ज्यादा पसंद नहीं आया. कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर हाथ से डोसा खाना अस्वच्छ कैसे हो सकता है, अगर खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोए गए हों.
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हाथ से खाना गलत नहीं
कई यूजर्स ने कहा कि हाथ से खाना भारतीय संस्कृति और खाने के अनुभव का हिस्सा है. उनके मुताबिक, साफ हाथों से खाना किसी भी तरह से अस्वच्छ नहीं माना जा सकता.
लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि हाथ से डोसा खाने को कम सभ्य या कम शालीन दिखाने की जरूरत ही क्यों है. उनके मुताबिक, चम्मच-कांटे का इस्तेमाल करना व्यक्तिगत पसंद हो सकता है, लेकिन इसे स्वच्छता का पैमाना नहीं बनाया जाना चाहिए.
एटिकेट और हाइजीन में अंतर
इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर एक और बहस शुरू हो गई कि एटिकेट और हाइजीन एक ही चीज नहीं हैं. किसी रेस्टोरेंट में चम्मच-कांटे से खाना वहां के तौर-तरीकों का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हाथ से खाना अस्वच्छ है.कई लोगों ने कहा कि अगर हाथ साफ हैं और खाने की जगह भी साफ है, तो हाथ से डोसा खाना बिल्कुल सामान्य है.
डोसा और हाथ से खाने का अपना अनुभव
भारत में डोसा आमतौर पर हाथों से तोड़कर सांभर और चटनी के साथ खाया जाता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई लोगों को एटिकेट कोच का तरीका जरूरत से ज्यादा औपचारिक लगा.लोगों का कहना था कि खाने का तरीका व्यक्ति की पसंद और जगह के हिसाब से बदल सकता है. अगर कोई रेस्टोरेंट में चम्मच-कांटे से डोसा खाना पसंद करता है तो इसमें कोई दिक्कत नहीं, लेकिन हाथ से खाने वाले व्यक्ति को कम शालीन या कम साफ-सुथरा बताना सही नहीं है.
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